राजनांदगांव :- तिलाई भाजपा मंडल अध्यक्ष परदेसी सोनबोईर ने कहा कि प्राकृतिक आपदा की इस घड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है। चक्रवात अर्णब के कारण प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में फसलों को हुए नुकसान को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार गंभीर है। सरकार ने प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने के लिए जिला कलेक्टरों को तत्काल फसल क्षति का सर्वेक्षण कराने और पात्र किसानों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत और उनकी आजीविका से जुड़े इस गंभीर विषय पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप करने के बजाय संवेदनशीलता दिखाने और प्रभावित किसानों को वास्तविक राहत दिलाने के लिए मिलकर प्रयास करने की जरूरत है।
श्री सोनबोईर ने कहा कि खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचना केवल कृषि उत्पादन में कमी का मामला नहीं है, बल्कि इसके साथ किसान परिवारों की आर्थिक स्थिति, सालभर की मेहनत और आगामी कृषि चक्र की तैयारियां भी जुड़ी होती हैं। किसान अपनी फसल से परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ ही अगली फसल की तैयारी और खेती की लागत जुटाने की उम्मीद रखते हैं। ऐसे में प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए समय पर सर्वेक्षण, पारदर्शी आकलन और पात्रतानुसार सहायता उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 30 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को फसल क्षति का तत्काल सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रभावित एवं पात्र किसानों को राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी) 6-4 के प्रावधानों और निर्धारित मानदंडों के अनुसार शीघ्र सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि फसल क्षति के सर्वेक्षण से लेकर सहायता वितरण तक की प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। श्री सोनबोईर ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रभावित किसानों तक राहत पहुंचाना है। इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों को पूरी गंभीरता से काम करना चाहिए ताकि वास्तविक नुकसान का सही आकलन हो और पात्र किसानों को समय पर सहायता मिल सके। उन्होंने कहा कि आपदा के समय किसान को सरकारी व्यवस्था से त्वरित सहयोग और भरोसे की जरूरत होती है। कृषि विभाग से संबंधित 30 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित जानकारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक फसल क्षति की 59,666 सूचनाएं प्राप्त हुई थीं। इनमें से 88 सूचनाओं का सर्वेक्षण पूरा हो चुका था, जबकि शेष मामलों में सर्वेक्षण की प्रक्रिया जारी थी। यह स्थिति बताती है कि प्रभावित क्षेत्रों में सर्वेक्षण कार्य को तेजी से पूरा करना और नुकसान का वास्तविक आकलन करना कितना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण के दौरान प्रभावित किसानों की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखा जाना चाहिए। किसी भी पात्र किसान को आवश्यक दस्तावेजों या प्रक्रिया संबंधी परेशानी के कारण अनावश्यक रूप से राहत से वंचित नहीं होना चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि वह प्रभावित किसानों को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराए और उनकी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करे। श्री सोनबोईर ने बताया कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों के लिए राजस्व सहायता के साथ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना भी महत्वपूर्ण है। प्रदेश में धान सहित कुल 11 अधिसूचित फसलें इस योजना के अंतर्गत शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रदेश में लगभग 21.26 लाख हेक्टेयर धान का रकबा बीमित कराया गया है। उन्होंने बताया कि खरीफ एवं रबी 2025-26 के दौरान 16.70 लाख से अधिक किसानों ने फसल बीमा कराया था तथा 1,40,730 किसानों को कुल 292.43 करोड़ रुपये की दावा राशि का भुगतान किया गया था। उन्होंने कहा कि राजस्व सहायता और फसल बीमा अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं। इसलिए प्रभावित किसानों को उनकी पात्रता और लागू नियमों के अनुसार दोनों व्यवस्थाओं का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक पहल की जानी चाहिए। श्री सोनबोईर ने किसानों से अपील की कि वे फसल नुकसान होने की स्थिति में बीमा संबंधी प्रक्रिया की अनदेखी न करें। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत स्थानीय आपदा तथा कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी गई फसल को हुए नुकसान पर निर्धारित शर्तों के अनुसार दावा किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि फसल नुकसान की सूचना घटना के 72 घंटे के भीतर देना जरूरी है। इसके लिए किसान कृषि रक्षक हेल्पलाइन नंबर 14447 पर सूचना दे सकते हैं। उपलब्ध योजना संबंधी जानकारी के अनुसार, सूचना मिलने के बाद बीमा कंपनी द्वारा 48 घंटे के भीतर सर्वेयर नियुक्त करने का प्रावधान है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत सर्वेक्षण और आकलन के बाद पात्र दावा राशि के भुगतान की व्यवस्था भी की गई है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे फसल क्षति की सूचना देने में देरी न करें और नुकसान से संबंधित आवश्यक जानकारी एवं दस्तावेज सुरक्षित रखें। जरूरत पड़ने पर संबंधित कृषि विभाग के अधिकारियों और बीमा कंपनी से संपर्क कर दावा प्रक्रिया की जानकारी लें, ताकि समयसीमा के कारण उनका दावा प्रभावित न हो। श्री सोनबोईर ने कहा कि प्राकृतिक आपदा किसी राजनीतिक दल को देखकर नहीं आती। इसका असर सभी प्रभावित किसानों और उनके परिवारों पर पड़ता है। इसलिए इस विषय को राजनीतिक विवाद बनाने के बजाय किसानों की मदद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार, प्रशासन और संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों से ही प्रभावित किसानों को समय पर राहत मिल सकती है। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देशों के अनुरूप सर्वेक्षण और सहायता वितरण की प्रक्रिया में तेजी आएगी तथा पात्र किसानों को नियमानुसार राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि किसान छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन की रीढ़ हैं। उनके हितों की रक्षा करना और संकट के समय उनके साथ खड़ा रहना सरकार, प्रशासन और समाज सभी की जिम्मेदारी है।