किरंदुल : शारदीय नवरात्रि के पंचम दिवस पर किरंदुल के राघव मंदिर में मां स्कंदमाता की विशेष पूजा-अर्चना की गई। प्रथम पुजारी सत्येंद्र प्रसाद शुक्ल ने बताया कि देवी के इस रूप को स्कंदमाता इसलिए कहा जाता है क्योंकि भगवान कार्तिकेय का एक नाम स्कंद है और स्कंद की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है।
मां की चार भुजाएं हैं, दो हाथों में कमल पुष्प, एक हाथ से पुत्र स्कंद को गोद में लिए हुए और एक हाथ वरद मुद्रा में है। कमल पर विराजमान होने के कारण इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है।
मान्यता है कि पंचमी के दिन मां स्कंदमाता के दर्शन-पूजन से संतान सुख, सुख-समृद्धि प्राप्त होती है और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस अवसर पर मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ दर्शन के लिए उमड़ी रही।