राजनांदगांव : शहर में एक ओर जनता बिजली, पानी, सड़क और सफाई जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रही है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम प्रशासन और महापौर “मस्ती की पाठशाला” में व्यस्त नजर आ रहे हैं। नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष संतोष पिल्ले ने महापौर मधुसूदन यादव और निगम प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जनता परेशान है लेकिन जिम्मेदारों को जनसमस्याओं की कोई चिंता नहीं है।
नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष संतोष पिल्ले ने शहर की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर निगम प्रशासन और महापौर पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी और आगामी बारिश को देखते हुए प्रशासन को मूलभूत सुविधाओं की तैयारी में जुटना चाहिए था लेकिन नगर निगम के जिम्मेदार लोग जनता की समस्याओं को नजरअंदाज कर मनोरंजन और आयोजनों में व्यस्त हैं। श्री पिल्ले ने आरोप लगाया कि शहर में अब तक सड़क डामरीकरण का कार्य पूरा नहीं हो पाया है। कई जगहों पर सड़कें अधूरी पड़ी हुई हैं जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जिन ठेकेदारों ने समय पर काम पूरा नहीं किया उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए। साथ ही अधूरे पड़े डामरीकरण कार्य को बारिश से पहले तत्काल पूरा कराने की मांग की। उन्होंने ने नंदई, सिंगई सहित शहर के विभिन्न इलाकों में नालों की सफाई व्यवस्था को भी पूरी तरह फेल बताया। उन्होंने कहा कि निगम प्रशासन द्वारा की गई सफाई सिर्फ थूक पॉलिश साबित हुई है। बरसात से पहले नालों की समुचित सफाई नहीं होने से जलभराव और गंदगी की समस्या विकराल रूप ले सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि बिजली विभाग द्वारा मेंटेनेंस के नाम पर कई पेड़ काटकर नालों में छोड़ दिए गए हैं जिससे नालों की स्थिति और भी खराब हो गई है। श्री पिल्ले ने कहा कि एक तरफ शहर की मूलभूत व्यवस्थाएं चरमरा रही हैं वहीं भाजपा नेता और निगम प्रशासन रविवार को मस्ती की पाठशाला में झूमते नजर आए। उन्होंने चौपाटी क्षेत्र की बदहाली का जिक्र करते हुए कहा कि वहां शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है लक्ष्मण झूला टूटा पड़ा है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने हाईमास्ट लाइट व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और कहा कि चौपाटी क्षेत्र में हाईमास्क लाइट लगाए जाने के बावजूद शाम होते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है। श्री पिल्ले ने निगम प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो जनता सड़कों पर उतरने मजबूर होगी।