आज के समय में कम लागत में बंपर लाभ कमाना चाहता, जिससे वह मलामाल बन सके, लेकिन उसे उसकी इच्छा के अनुसार लाभ शायद ही मिल पाता हो, ऐसे में जनपद के एक प्रोफेसर ने दावा है कि मोतियों जैसे आधुनिक रंग बिरंगे टमाटर की खेती यदि किसान करें तो लागत से कही ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है.
मोतियों के आकार का यह टमाटर लाल, पीले और हरे रंग में के भी होते हैं. ये वही टमाटर की प्रजाति है, जिसका सलाद बड़े होटलों के डाईनिंग टेबूल की रौनक में चार चांद लगाता है. इसका स्वाद भी लाजवाब होता है. साथ ही यह टमाटर पौष्टिकता और विटमिन से भी भरपूर होता है.
आमतौर पर टमाटर की खेती खेतों की मेड़ पर छोटे छोटे पौधों के माध्यम से की जाती है, लेकिन इस टमाटर की खेती किचन गार्डेन, पाली हाउस या छतों पर रस्सी के सहारे इसकी लताएं फैलती है और किसानों को ज्यादा मेहनत भी नही करनी पड़ती है. एक लता मे पांच सौ से एक हजार फल अंगूर के गुच्छों की तरह उत्पादित होते हैं. यह टमाटर लगभग 15 दिनों तक खराब नहीं होता है.
टाउन महाविद्यालय बलिया के अनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन के विशेषज्ञ प्रो. बृजेश सिंह ने बताया कि टमाटर की इस अनोखी प्रजाति का कोई जवाब नही है. इसे देखकर आसानी से अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है कि यह टमाटर है. लेकिन खाने के बाद अक्सर लोगों के मुंह से निकल जाता है कि अरे! यह तो टमाटर है.
लोगों को अपनी ओर आकर्षित वाला यह टमाटर किसानों को मालामाल बना सकता है. इसकी नर्सरी लगभग 25 दिन में तैयार हो जाती है. उसके बाद निश्चित दूरी पर इसको लगा दिया जाता है और धीरे-धीरे रस्सी या बांस के सहारे इसको ऊपर चढ़ाया जाता है. लगभग 60 दिनों में यह फल देने लगता है.