राजनांदगांव: ग्राम पंचायतों के समग्र, सुनियोजित एवं सतत विकास को गति देने के उद्देश्य से वीबीजी रामजी योजना के अंतर्गत विकसित ग्राम पंचायत प्लान तैयार करने के संबंध में जनपद पंचायत छुईखदान के सभाकक्ष में सरपंचों एवं सचिवों की बैठक सह कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में विकासखंड छुईखदान की समस्त ग्राम पंचायतों के सरपंचों एवं सचिवों ने भाग लिया। बैठक की संयुक्त अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष प्रियंका खम्मन ताम्रकार, जिला पंचायत उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रेम कुमार पटेल ने की। इस दौरान ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की प्राथमिकता निर्धारित करने, उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने तथा ग्रामीणों की आवश्यकताओं के अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने के संबंध में विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया। कार्यशाला में बताया गया कि विकसित ग्राम पंचायत प्लान पंचायतों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत में उपलब्ध परिसंपत्तियों, आधारभूत सुविधाओं एवं संसाधनों का आकलन कर विकास संबंधी आवश्यकताओं और कमियों की पहचान की जाएगी। इसके आधार पर स्थानीय परिस्थितियों एवं ग्रामीणों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकास कार्यों का चयन किया जाएगा। कार्ययोजना तैयार करने में ग्राम सभा की सहभागिता एवं अनुशंसाओं को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे विकास कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी सुनिश्चित हो सके।
ग्राम सभा की सहभागिता से तैयार होगी विकास की कार्ययोजना
बैठक में जनप्रतिनिधियों ने ग्राम पंचायतों के विकास में सरपंचों एवं सचिवों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों के विकास के लिए योजनाओं का निर्माण स्थानीय आवश्यकताओं एवं ग्रामीणों की प्राथमिकताओं के आधार पर किया जाना चाहिए। ग्राम सभा के माध्यम से ग्रामीणों के सुझाव प्राप्त कर ऐसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाए, जिनसे अधिक से अधिक लोगों को लाभ मिल सके। साथ ही विकास कार्यों के चयन में दूरदर्शिता अपनाते हुए गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण एवं बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रेम कुमार पटेल ने विकसित ग्राम पंचायत प्लान तैयार करने की प्रक्रिया के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने ग्राम पंचायतों को योजना के अंतर्गत अनुमन्य कार्यों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर प्रस्ताव तैयार करने तथा निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप कार्यों का नियोजन एवं क्रियान्वयन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की कार्ययोजना व्यावहारिक, आवश्यकता आधारित एवं ग्राम के दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखकर तैयार की जाए। कार्यशाला में योजना के अंतर्गत मजदूरी एवं सामग्री का निर्धारित 60:40 अनुपात बनाए रखने के संबंध में भी विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।