राजनांदगांव: सर्वाइकल कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से बेटियों को बचाने के लिए शुरू किए गए एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान को जिले में अपेक्षित गति नहीं मिल पा रही है। डर और झिझक के कारण करीब 2000 किशोरियां अब भी इस सुरक्षा कवच से दूर हैं। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत राजनांदगांव जिले में 10500 किशोरियों के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन अब तक केवल 8500 किशोरियों को ही टीका लगाया जा सका है। खासकर शहरी क्षेत्र में किशोरियों के टीकाकरण के लिए आगे नहीं आने से लक्ष्य पूरा करने की चुनौती बनी हुई है। महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए एचपीवी टीकाकरण को महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी उद्देश्य से 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों को टीका लगाने का अभियान चलाया जा रहा है, ताकि भविष्य में उन्हें इस गंभीर बीमारी से बचाव में मदद मिल सके। इसके बावजूद जागरूकता की कमी, मन में बैठा डर और टीके को लेकर झिझक अभियान की रफ्तार प्रभावित कर रही है।
जिले में निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले अब भी करीब 2000 किशोरियों का टीकाकरण बाकी है। अब तक लगभग 81 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जा चुका है, जबकि करीब 19 प्रतिशत लक्ष्य अधूरा है। शेष किशोरियों का टीकाकरण पूरा करने के लिए अभिभावकों और किशोरियों के बीच जागरूकता बढ़ाना जरूरी होगा। टीके को लेकर फैली आशंकाओं को दूर कर इसके महत्व की जानकारी देना भी अहम है।
छह प्रकार के कैंसर से बचाता है यह एक टीका
एचपीवी टीका महत्वपूर्ण और सुरक्षित सुरक्षा कवच है। यह महिलाओं में बच्चेदानी के मुंह के कैंसर को रोकने में 90 प्रतिशत तक सक्षम है। इसके अलावा यह पुरुषों और महिलाओं दोनों में गुदा, मुंह, गले और जननांगों के मस्सों (जेनिटल वार्ट्स) सहित छह प्रकार के घातक कैंसर से दीर्घकालिक सुरक्षा देता है। किशोरावस्था (नौ से 14 वर्ष) में यह टीका सबसे ज्यादा प्रभावी और कारगर माना जाता है। अभिभावकों को बिना किसी डर के अपनी बेटियों का टीकाकरण कराना चाहिए। यह सभी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी/सीएचसी) में पूरी तरह निश्शुल्क उपलब्ध है।