राजनांदगांव : सफलता के लिए मन का मजबूत होना और संकल्प के साथ काम शुरू करना जरूरी है। विपरीत परिस्थितियों में घबराने के बजाय आत्मविश्वास बनाए रखें। काम शुरू करने से पहले स्थिति को अच्छी तरह समझें और फिर पूरे विश्वास के साथ आगे बढ़ें। खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर के शिष्य मुनि समयप्रभ सागर ने ज्ञान वल्लभ उपाश्रय भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में यह संदेश दिया।
मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने बताया कि मुनि समयप्रभ सागर ने कहा कि किसी भी काम को शुरू करने से पहले दो बार विचार करना चाहिए। परिस्थिति का सही आकलन करने और उसे स्वीकार करने के बाद संकल्प लेकर काम शुरू करें। इससे लक्ष्य तक पहुंचने की राह आसान होती है। विपरीत हालात में भी धैर्य और दृढ़ विश्वास बनाए रखना चाहिए।
मुनि ने कहा कि सच्चा संगीतज्ञ अपनी आत्मसंतुष्टि के लिए गाता-बजाता है, वह केवल धन के पीछे नहीं भागता। इसी तरह मनुष्य को भी बाहरी उपलब्धियों के बजाय आत्मसंतुष्टि को महत्व देना चाहिए। हमारा शरीर एक वाद्य यंत्र की तरह है। जब मन और शरीर के बीच तालमेल बनता है, तो जीवन आनंदमय हो जाता है।
सफलता के साथ विनम्रता भी जरूरी
मुनि समयप्रभ सागर ने कहा कि सफलता मिलने पर प्रसन्न होना स्वाभाविक है, लेकिन इसके साथ अहंकार नहीं आना चाहिए। पूर्णिमा का चांद पूर्णता का प्रतीक है। इसी तरह प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आत्मा को पूर्ण बनाने की कामना करनी चाहिए। दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और विनम्रता के साथ किए गए प्रयास जीवन को सार्थक बनाते हैं।