July 05, 2024


नेता विपक्ष का आक्रामक आगाज

-:संपादकीय :-

नेता विपक्ष का आक्रामक आगाज

सोमवार एक जुलाई को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर राहुल गांधी ने पहला भाषण दिया, जो इतना आक्रामक और उत्तेजक था कि प्रधानमंत्री मोदी समेत आधा दर्जन केंद्रीय मंत्रियों को बार-बार आपत्ति दर्ज करानी पड़ी। इन मंत्रियों में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह को भी हस्तक्षेप करना पड़ा। गृह मंत्री ने पहली बार लोकसभा में स्पीकर का संरक्षण मांगा और नियमों को लेकर वह कुछ असहाय और आक्रोश में दिखे। हमने संसदीय कवरेज के अपने लंबे अनुभव में पहली बार देखा कि प्रधानमंत्री ने नेता विपक्ष के भाषण के दौरान टोका-टोकी की और कहा-‘पूरे हिंदू समाज को हिंसक कहना बहुत गंभीर विषय है। संविधान ने मुझे सिखाया है कि विपक्ष के नेता को गंभीरता से लेना चाहिए।’ यह राहुल गांधी का पूरी तरह ‘राजनीतिक भाषण’ था। राष्ट्रपति अभिभाषण की उन्हें परवाह ही नहीं थी। यह भी पहली बार लोकसभा में हुआ कि नेता विपक्ष ने भगवान शिव, ईसा मसीह, गुरु नानकदेव, महावीर स्वामी की कथित ‘अभय मुद्रा’ वाली तस्वीरों को बार-बार दिखाया। यह सदन के नियम 349 का उल्लंघन था। स्पीकर ओम बिरला ने बार-बार सदन की गरिमा और मर्यादा की दुहाई दी, लेकिन नेता प्रतिपक्ष की रणनीति कुछ और ही थी। नेता विपक्ष ने पहली बार ऐसा भाषण दिया, जिसमें आठ संसदीय नियमों का उल्लंघन किया गया। इस पर स्पीकर क्या निर्णय लेते हैं, यह देखना अभी शेष है। नेता प्रतिपक्ष के आगाजी भाषण में राहुल गांधी ने हिंदू, अग्निवीर, नीट, किसान से लेकर प्रधानमंत्री मोदी तक अपने प्रहारों के निशाने पर रखे। यह भी संसद में पहली बार देखा गया कि नेता विपक्ष ने भाजपा के सबसे महत्वपूर्ण ‘हिंदू कार्ड’ को निरस्त करने की कोशिश की। राहुल खुद को बड़ा और मौलिक हिंदू साबित करने में लगे रहे। उन्होंने स्थापना दी कि आरएसएस, भाजपा और प्रधानमंत्री ही हिंदू समाज नहीं हैं।

जो खुद को हिंदू मानते हैं, वे 24 घंटे हिंसा और नफरत फैलाते रहते हैं। वे हिंदू नहीं, हिंसक हैं। राहुल के इस कथन पर साधु-संतों और संघ नेताओं ने तल्ख प्रतिक्रियाएं दी हैं। दरअसल नेता प्रतिपक्ष ने ‘हिंदू’ के जरिए देश के 110 करोड़ हिंदुओं तक अपना संदेश पहुंचाना चाहा है। वे राहुल गांधी के हिंदू और धार्मिक ज्ञान को किस तरह ग्रहण करते हैं, यह भविष्य की राजनीति है। इतना कहा जा सकता है कि सोमवार का दिन नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का दिन था। वह विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ का भी दिन था, क्योंकि विपक्षी सांसद अपने नेता के साथ एकजुट और आक्रामक रहे। राहुल की राजनीति और रणनीति की यही निरंतरता बरकरार रहेगी, भविष्य में देखना होगा। हालांकि अयोध्या के लोगों के मुआवजे और अग्निवीर की शहादत पर एक करोड़ रुपए की सरकारी मदद आदि के स्पष्टीकरण सरकार की तरफ से दिए जा चुके हैं, लेकिन नेता प्रतिपक्ष को तथ्यात्मक गलतियों से बचना चाहिए। बीते दिनों एक अग्निवीर शहीद हुआ था, जिसे सरकार की ओर से 1.65 करोड़ रुपए से अधिक की सरकारी मदद दी गई थी। इसी तरह नेता विपक्ष ने यह भी गलत कहा है कि प्रधानमंत्री अयोध्या से चुनाव लडऩा चाहते थे, लेकिन सर्वे करने वालों ने उन्हें मना कर दिया। प्रधानमंत्री ने वाराणसी के अलावा कहीं और से चुनाव लडऩा सोचा भी नहीं था, ऐसी रपटें मीडिया में आ चुकी हैं। बहरहाल राहुल गांधी के पहले ही भाषण से उनका आत्मविश्वास झलका।

उन पर लगातार हमले किए जाते रहे, लेकिन उन्होंने अपने भाषण की लय नहीं टूटने दी। बेशक उनका भाषण आक्रामक था, लेकिन उसमें अभी तार्किकता और परिपक्वता शेष है। नेता विपक्ष के भाषण का जो समग्र जवाब प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को दिया है, उसका विश्लेषण बाद में करेंगे, लेकिन अब इतना तय है कि भविष्य की ‘राजनीतिक लकीर’ खिंच चुकी है। विपक्ष ने सत्ता पक्ष को सचेत कर दिया है कि अब चुनाव अपेक्षाकृत सरल नहीं होंगे, क्योंकि फिलहाल ‘इंडिया’ के बिखरने के संकेत नहीं हैं। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को चुनौती दी है, लिहाजा अब समीकरण बिल्कुल प्रत्यक्ष हैं कि विपक्ष खोखला नहीं है। अभी कई मुद्दे अगले संसद सत्र में सामने होंगे, क्योंकि संपूर्ण बजट पेश किया जाना है। देखते हैं कि मोदी सरकार की यह पारी कैसी रहती है? सरकार को अर्थपूर्ण आलोचना सुनने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।


Advertisement

Tranding News

Get In Touch