October 23, 2026


बचपन में ही सही अभ्यास से दूर किया जा सकता है तोतलापन और हकलाहट

लगभग 12 वर्षों से डेढ़ हजार से अधिक लोगों की समस्या का समाधान कर चुकीं हैं रजनी राठी

राजनांदगांव: अक्सर समाज में या स्कूलों में कुछ बच्चों को बोलते समय अटकते (हकलाते) या शब्दों का गलत उच्चारण करते (तुतलाते) देखा जाता है। कई बार लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते या बच्चों का मजाक उड़ाने लगते हैं। मनोचिकित्सकों और डाक्टरों के अनुसार यह उपेक्षा बच्चों के मानसिक विकास पर गहरा असर डालती है, जिससे वे हीनभावना का भी शिकार हो जाते हैं और दूसरों के सामने बोलने से कतराने लगते हैं। लेकिन आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और स्पीच थेरेपी की मदद से इस समस्या को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। बचपन में ही सही अभ्यास से इन समस्याओं को दूर किया जा सकता है।

पिछले लगभग 12 वर्षों से कम या देर से बोलने, तोतलाने व हकलाने वालों का स्पीच थेरेपी से उपचार करने वाली शहर की लैंग्वेज पैथोलाजिस्ट रजनी राठी बतातीं हैं कि तोतलापन और हकलाहट दो अलग-अलग स्थितियां हैं। तोतलापन ज्यादातर जीभ की बनावट (जैसे टंग-टाई) या गलत तरीके से बोलने की आदत के कारण होता है। वहीं, हकलाहट के पीछे न्यूरोलाजिकल कारण, आनुवंशिकी या अत्यधिक मानसिक तनाव हो सकता है। यदि तीन से पांच वर्ष की आयु में ही इस समस्या की पहचान कर ली जाए, तो इसे बहुत आसानी से और जल्दी ठीक किया जा सकता है। वयस्क होने पर भी सही तकनीकों से इसमें बड़ा सुधार संभव है। तोतलापन और हकलाहट को मुख्य रूप से स्पीच थेरेपी, विशेष जीभ व सांस के व्यायाम, और धैर्य के साथ नियमित अभ्यास से काफी हद तक ठीक किया जा सकता है।

समाधान के आसान मुख्य उपाय

-किसी विशेषज्ञ या स्पीच-लैंग्वेज पैथोलाजिस्ट से थेरेपी लें।

-धीरे-धीरे बोलना, सांस पर नियंत्रण और शब्दों के सही उच्चारण का अभ्यास करें

रोजाना 20 से 30 मिनट आईने के सामने खड़े होकर तेज आवाज में अखबार या किताब पढ़ें।-बोलते समय शब्दों को जल्दबाजी में न कहें। बहुत आराम से और शब्दों को थोड़ा खींचकर बोलने का अभ्यास करें।- स्ट्रा (पाइप) से पानी या जूस पीने की आदत डालें। यह जीभ की मांसपेशियों को मजबूत बनाने का सबसे अच्छा व्यायाम है।

जब भी बोलना शुरू करें, पहले फेफड़ों से एक गहरी सांस लें और छोड़ते हुए शब्दों को बाहर निकालें।

जीभ को गोल घुमाएं या आगे-पीछे करें

होंठों को थपथपाना (जैसे घोड़े की आवाज निकालना)।

 स्पीच थैरेपी से रजनी राठी दूर कर रहीं हकलाहट 

हकलाहट या तोतलापन कई बार उपहास का कारण बन जाता है। ऐसे लोग समाज में स्वयं को असहज महसूस करते हैं। इन्हीं में शामिल बच्चे हों या बड़े-बूढ़े, अपनी हकलाहट दूर करने समाजसेवी रजनी राठी की क्लास में अवश्य पहुंचते हैं। तछह माह से तीन वर्ष तक की स्पेशल स्पीच थैरेपी से शहर की रजनी राठी सह समय पर या सहजता से नहीं बोल पाने वालों की हकलाहट दूर कर रहीं हैं। सुबह-शाम डेढ़-डेढ़ घंटे की क्लास में वे बेहद सामान्य ढंग से जन्मजात इस समस्या को आसानी से दूर कर देतीं हैं। इसके लिए उनके पास शब्दों की कुछ श्रृंखलाएं हैं। उसे रटवाती हैं। बार-बार उच्चारण करातीं हैं। इसके लिए उन्होंने विशेष कोर्स भी किया है। पिछले 11 वर्ष में उन्होंने डेढ़ हजार से अधिक लोगों की हकलाहट दूर की है। इनमें अधिकांश बच्चे हैं। रजनी कहतीं हैं कि हकलाहट या तोतलापन के चलते किसी को उपहास का सामना न करना पड़े, इसलिए उन्होंने इसे दूर करने के लिए अभियान छेड़ रखा है। इसके लिए वे छत्तीसगढ़ के कई जिलों में निश्शुल्क चिकित्सा शिविर कर चुकीं हैं।



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