October 23, 2026


२९० करोड़ की राजनांदगांव से मोहला मानपुर सडक़ के भ्रष्टाचार और गुणवत्ताहीन निर्माण करने वाले ठेकेदार के खिलाफ कार्यवाही का खुलासा

 राजनांदगांव :-  २९० करोड़ की राजनांदगांव से मोहला मानपुर सडक़ के भ्रष्टाचार और गुणवत्ताहीन निर्माण करने वाले ठेकेदार के खिलाफ कार्यवाही का खुलासा विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी के रहते होना संभव नही ? इस पूरे मामले की जांच ईओडब्ल्यू से कराने की मांग- ओस्तवाल

(भाजपा सांसद पाण्डेय द्वारा फर्जी दस्तावेज की शिकायत भाजपा नेता भरत वर्मा द्वारा गुणवत्ताहीन निर्माण की शिकायत)

(क्या ये दोनों ही भाजपा के नेताओं की शिकायत शासन को फर्जी दिख रही है ? और 

यदि इनकी शिकायत फर्जी है तो इसका खुलासा शासन के जवाबदार अधिकारी सार्वजनिक करें।)

१. राजनांदगांव शहर कांग्रेस के पूर्व महामंत्री एवं पूर्व पार्षद हेमंत ओस्तवाल ने एक पत्र के माध्यम् से देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं लोक निर्माण विभाग छ.ग. शासन के सचिव से यह मांग की है कि राजनांदगांव से मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी हेतु २९० करोड़ रूपयों की सडक़ डामरीकरण की निविदा टेंडर में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अमर इन्फ्रास्ट्रक्चर दुर्ग के ठेेकेदार चतुर्भुज राठी के द्वारा टेंडर लिया गया और शासन को करोड़ो रूपयों की राशि का २० प्रतिशत बिलो में स्वीकृत किया गया जिसे बाद में बदलकर १७ प्रतिशत कर दिया गया इस तरह  भ्रष्टाचार का खुला खेल खेला गया जिससे लगभग शासन को ९ करोड़ रूपयों का नुकसान हुआ जिसकी शिकायत राजनांदगांव जिले के भाजपा सांसद संतोष पाण्डेय के द्वारा दिनांक २५ मई २०२६ को सचिव लोक निर्माण विभाग छ.ग. शासन से की गई शिकायत के बाद ठेकेदार के विरूद्ध क्या-क्या कार्यवाही की गई इसका खुलासा आज तक नही हुआ और ठेकेदार अमर इन्फ्रास्ट्रक्चर दुर्ग के ठेेकेदार चतुर्भुज राठी का टेंडर निरस्त किया गया ।

२. दुसरे ठेकेदार के.एल. अग्रवाल को २९० करोड़ की राजनांदगांव से मोहला मानपुर सडक़ डामरीकरण और पुल पुलिये के निर्माण हेतु जारी किया गया कार्यादेश और उक्त ठेकेदार के द्वारा शासन के नियम विरूद्ध सडक़ निर्माण की निविदा शर्तों का उल्लंघन और गुणवत्ताहीन सडक़ निर्माण आदि का कार्य किया गया जिसकी शिकायत भाजपा के वरिष्ठ नेता और जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के उपाध्यक्ष भरत वर्मा के द्वारा गुणवत्ताहीन सडक़ निर्माण और भ्रष्टाचार से संबंधित उच्च स्तरीय जांच की मांग विभागीय मंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों से की गई और दोनों मामलो के भ्रष्टाचार और गुणवत्ताहीन निर्माण की शिकायत करने वाले दोनों ही नेता भारतीय जनता पार्टी के है सबसे पहला प्रश्न अब यह है कि राजनांदगांव जिले के सांसद और प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रवक्ता संतोष पाण्डेय के द्वारा जो फर्जी दस्तावेज के आधार पर निविदा टेंडर लेने वाले दुर्ग के ठेकेदार अमर इन्फ्रास्ट्रक्चर चतुर्भुज राठी का भ्रष्टाचार का मामला विष्णुदेव साय की भाजपा सरकार में दफन कैसे हो गया क्योंकि प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तो यह कह रहे है कि भ्रष्टाचारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही का संकल्प भाजपा के नेताओं ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के भ्रष्टाचार मुक्त सपनों को पूरा करने का लिया है लेकिन विष्णुदेव की भाजपा सरकार में उनके स्वयं के  भाजपा संासद संतोष पाण्डेय के द्वारा जो शिकायत की गई थी उस पर भाजपा सांसद पाण्डेय सहित विभाग के अधिकारी और मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री का चुप रहना ? यह दर्शाता है कि भाजपा की इस सरकार में खाली वसूली का खेल चल रहा है ? और यदि वसूली का खेल नही है तो ? खुलासा क्यों नही कर पा रही है भाजपा सरकार श्री ओस्तवाल ने कहा की दुसरी शिकायत २९० करोड़ की राजनांदगांव से मोहला मानपुर सडक़ निर्माण आदि मे भ्रष्टाचार और गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य की शिकायत विधानसभा के भाजपा प्रत्याशी रहे और वर्तमान में जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के उपाध्यक्ष भरत वर्मा जी के द्वारा शिकायत विभागीय मंत्री संबंधित अधिकारी और कलेक्टर राजनंादगांव आदि से की गई जिनकी शिकायत पर विभाग के द्वारा पीडब्ल्यूडी के चार सदस्यों की जांच समिति ०३ अक्टूबर २०२६ को गठित कर तीन दिन के अंदर प्रमुख अभियंता को रिपोर्ट देने का आदेश मुख्य अभियंता वी.एस. कोरम अधीक्षण अभियंता राजीव नशीने तथा कार्यपालन अभियंता प्रभात सक्सेना और सी.एस. ओंगरे को निर्देशित किया गया लेकिन ०७ अक्टूबर तक जांच रिपोर्ट की समय सीमा पर इसका खुलासा सार्वजनिक नही हुआ क्यो? भ्रष्टाचार के मामलों का मास्टर माइंड विभागीय लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता अधिकारी श्री वी.के. भतपहरी के रहते यह २९० करोड़ की राजनांदगांव मोहला मानपुर का खुलासा भी पुरी पारदर्शिता से होना मुश्किल नज़र आ रहा है ? क्योंकि वी.के. भतपहरी के खिलाफ पूर्व में अनेकों भ्रष्टाचार की शिकायत भाजपा के कद्दावार पूर्व गृह मंत्री ननकी राम कंवर ने भी की है ठीक उसी तरह छ.ग. शासन के लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश बंसल जी के द्वारा जिस तरह कल दिनांक २२/१०/२०२६ को २९० करोड़ रूपयों की लागत से राजनांदगांव जिले के मोहला मानपुर आदि सडक़ो के भ्रष्टाचार और गुणवत्ता जांचने मौके स्थलों का निरीक्षण किया गया और उनके साथ जिस तरह से मुख्य अभियंता वी.के. भतपहरी एवं मुख्य अभियंता एन.के. जयंत आदि अधिकारियों की टीम के साथ सडक़ की मोटाई चौड़ाई और लेवल आदि बिन्दूओं की जांच रिपोर्ट मुख्य सचिव ने मांगी है तो क्या जो तीन सदस्यी विभागीय जांच शासन स्तर पर विभाग द्वारा गठित की गई थी और उन अधिकारियों को तीन दिनों के भीतर ०७ अक्टूबर २०२६ तक रिपोर्ट को देना था लेकिन उनके द्वारा समय सीमा पर जांच प्रतिवेदन रिपोर्ट नही देना और जांच प्रतिवेदन रिपोर्ट का खुलासा नही होना ही ठेकेदार से मोटी राशि वसूल कर मामले को रफा-दफा करना स्वयंमेव ही दर्शा रहा है ? क्योंकि जब तीन दिनों के भीतर मौके स्थल की जांच रिपोर्ट देने का आदेश उन अधिकारियों को दिया गया था और कल सचिव महोदय के साथ मौके स्थल पर वे चारों अधिकारी का नही होना स्वयंमेव दर्शाता है कि वी.के. भतपहरी जब उन बड़े ठेकेदारों को बचाने का पूरा प्रयास कर रहे है तो ? मौके स्थल पर विभाग के सचिव मुकेश बंसल जी को संबंधित विभाग के प्रमुख अधिकारियों के द्वारा टेकनीकल किसी प्वाइंट का खुलासा  नही किया गया और ना ही आज के समाचार पत्रों में जवाबदार अधिकारियों या विभाग के द्वारा सचिव महोदय के संज्ञान में किसी गुणवत्ताहीन निर्माण का उल्लेख करवाया। श्री ओस्तवाल ने बिन्दूवार कुछ टेकनिकल प्वाइंट की जांच छ.ग. शासन लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश बंसल से कराने की मांग की है -१. उक्त ठेकेदार का डब्ल्यूबीएम प्लांट की क्षमता कितनी है और उक्त ठेकेदार के द्वारा डब्ल्यूबीएम प्लांट किस-किस जगह पर लगाया गया उसके मौके स्थल के फोटोग्राफ्स और संबंधित विभाग के कार्यपालन अभियंता (ई) के द्वारा सत्यापित किये गये दस्तावेजों की जांच की जाये। २. उक्त प्लांट से कितना-कितना माल प्रतिदिन निकला है वह जांच किया जाये । ३. उक्त ठेकेदार के द्वारा प्लांट कौन-कौन सा किस स्थान पर दर्शाया  गया है उसके संपूर्ण मालिकाना हक के दस्तावेज की भी जांच की जाये । ४. मौके स्थल पर सडक़ की थिकनेस और उसकी मोटाई-चौड़ाई कितनी चाहिये थी और कितनी ठेकेदार के द्वारा बनाई गई उसकी जांच। ५. उक्त जांचकर्ता अधिकारियों के द्वारा ठेकेदार के द्वारा बनाई गई सडक़ों की कोर कटिंग टेस्ट और सडक़ों से बेलनाकार नमूना निकालकर परतों की मोटाई की जांच की गई। ५. निर्माण में इस्तेमाल बिटुमिन कंटेंट टेस्ट डामर की मात्रा निर्धारित अनुपात से लिया गया है या उससे कम लिया गया है उसके समस्त डामर के खरीदी बिक्री के बिलों की जांच। ६. सडक़ की रोड़ रफनेस टेस्ट की जांच। ७. मौके स्थल पर  हुए सडक़ डामरीकरण के फील्ड डेंसिटी और कम्पेक्शन की जांच आदि अन्य बिन्दुओं की जांच करवाने हेतु इस पूरे मामले को ईओडब्ल्यू को सौंपा जाये जिससे की भ्रष्ट ठेकेदार और विभागीय जिन अधिकारियों की मिलीभगत इस भ्रष्टाचार और गुणवत्ताहीन निर्माण करने वाले ठेकेदार के साथ जो लोग संलिप्त है उन पर कठोर कार्यवाही होना जनहित और शासनहित में होगा ।



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