राजनांदगांव: यात्रियों की सुरक्षा को लेकर छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग ने सभी यात्री बसों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन अनिवार्य करते हुए लगवाने या बंद पड़े उपकरणों को चालू कराने के निर्देश जारी किए थे। साथ ही नियमों का पालन नहीं करने वाले बस संचालकों पर परमिट निरस्त करने और मोटरयान अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। लेकिन निर्धारित समय-सीमा बीतने के बाद भी अधिकांश बसों में न तो एलटीडी लगाए गए हैं और न ही पैनिक बटन सक्रिय हुए हैं। ऐसे में परिवहन विभाग के आदेशों की गंभीरता पर सवाल उठने लगे हैं। यात्रियों की सुरक्षा के लिए जारी किए गए इस आदेश का जमीनी स्तर पर कोई खास असर दिखाई नहीं दे रहा है। बड़ी संख्या में यात्री बसें अब भी बिना ट्रैकिंग सिस्टम और पैनिक बटन के सड़कों पर दौड़ रही हैं। यहीं नहीं फिटनेस और बिना बीमा के बसों का संचालन किया जा रहा है। दो दिन पहले फ्लाइंग स्कवाड की टीम ने बसों की जांच की थी। इस दौरान कई खामियां पाई गई थी।
बस चालकों को पता ही नहीं पैनिक बटन
इधर, बस संचालक शासन को पैनिक बटन और जीपीएस लगाने की जानकारी दे रहे हैं। नईदुनिया की टीम ने सोमवार को खैरागढ़ रोड, नंदई चौक, बसंतपुर से गुजरने वाली बसों की पड़ताल की। किसी भी बस में पैनिक बटन मिले और न ही जीपीएस। चालकों से पैनिक बटन के बारे में पूछा गया तो चालकों ने किसी भी तरह की जानकारी नहीं होने की बात कहीं। शुरुआती दिनों में परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बस संचालकों पर दबाव डाला तो कुछ संचालकों ने पैनिक बटन व जीपीएस लगवाए थे। पैनिक बटन 112 की तरह काम करेगा। लाल रंग का बटन बस की हर सीट के ऊपर लगा होगा। बटन तीन सेकंड तक दबाना होगा। इसके बाद मैसेज और बस की लाइव लोकेशन कंट्रोल रूम को मिलेगी। मैसेज की सत्यता जांचने के बाद बस की लाइव लोकेशन और मैसेज भेजा जाएगा। इसके बाद नजदीकी थाने पर मैसेज भेजकर यात्री को सहायता मुहैया करवाई जाएगी। यदि किसी यात्री ने गलती से पैनिक बटन दबाया तो कंट्रोल रूम संबंधित बस ड्राइवर कंडक्टर और यात्री से बात कर मैसेज की सत्यता जांचेगा।
अनियमिता मिलने पर बस संचालकों को थमाई नोटिस
दुर्ग परिवहन उड़नदस्ता दल ने खैरागढ़ रोड और बस स्टैंड क्षेत्र में जांच प्वाइंट बनाकर बसों के दस्तावेजों और परिवहन नियमों की पड़ताल की। अभियान के दौरान 26 यात्री वाहनों की जांच की गई, जिसमें विभिन्न अनियमितताएं मिलने पर मोटरयान अधिनियम के प्रावधानों के तहत 9500 रुपये शमन शुल्क वसूल किया गया। बसों के फिटनेस प्रमाण पत्र, बीमा, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र, परमिट, निर्धारित क्षमता से अधिक सवारी बैठाने और तय दर से अधिक यात्री किराया वसूलने सहित विभिन्न बिंदुओं की जांच की गई। अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी अनिल भगत ने बताया कि जांच के दौरान दस्तावेजों की वैधता समाप्त होने से संबंधित मामलों में 29 बसों के फिटनेस प्रमाण पत्र, 26 वाहनों के बीमा, पांच वाहनों के परमिट और 91 वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र की वैधता समाप्त पाए जाने पर संबंधित वाहन स्वामियों को नोटिस जारी किए गए हैं। उन्हें आवश्यक दस्तावेजों का नवीनीकरण कराकर नियमानुसार वाहन संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।