राजनांदगांव : जिले में राजस्व व्यवस्था पर हड़ताल का असर पड़ने की आशंका है। मंगलवार को जिले के 148 पटवारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। हड़ताल की रणनीति अचानक तैयार होने के कारण लोगों को इसकी पहले से जानकारी नहीं मिल सकी। ऐसे में जमीन से जुड़े कामों के लिए तहसील और पटवारी कार्यालय पहुंचने वाले नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खास बात यह है कि इन दिनों डिजिटल क्राप सर्वे, स्वामित्व योजना के तहत भूखंड के सर्वे का काम भी जारी है। ऐसे समय में पटवारियों के काम बंद करने से सर्वे और राजस्व संबंधी सेवाओं की गति प्रभावित होने की आशंका है।
जिले के सभी 148 पटवारी जिला कार्यालय के सामने फ्लाई ओवर के नीचे सुबह 10 बजे जुटे और पांच बजे तक प्रदर्शन करते रहे। संघ ने 12 अक्टूबर को जिला प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में पीवी ऐप के माध्यम से फसलों के भौतिक सत्यापन में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों, लंबित मांगों और कार्रवाई से जुड़े मुद्दे उठाए थे। संघ का कहना है कि समस्याओं से शासन-प्रशासन को अवगत कराने के बाद भी उनका व्यावहारिक समाधान नहीं किया गया। इसी के विरोध में 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया गया है।
पीवी ऐप की दिक्कतों से बढ़ी नाराजगी
पटवारी संघ के ज्ञापन के अनुसार, पीवी ऐप के माध्यम से फसलों का भौतिक सत्यापन करने में व्यावहारिक कठिनाइयां आ रही हैं। अध्यक्ष भीषम ठाकुर का आरोप है कि इन समस्याओं के बावजूद पटवारियों पर ऐप के माध्यम से काम करने का दबाव बनाया जा रहा है और काम पूरा नहीं होने पर कार्रवाई भी की जा रही है। इसके साथ ही वर्षों से लंबित मांगों, वेतन विसंगति और पदोन्नति के मामलों का निराकरण नहीं होने को भी आंदोलन की वजह बताया गया है। संघ ने शासन-प्रशासन से इन समस्याओं का समाधान करने की मांग की है।
आखिर क्यों आंदोलन कर रहे पटवारी?
-पीवी ऐप की व्यावहारिक दिक्कतें: डिजिटल क्राप सर्वे के दौरान फसलों के भौतिक सत्यापन में आ रही तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं का समाधान करने की मांग।
-कार्रवाई का विरोध: संघ का आरोप है कि ऐप संबंधी समस्याओं के बावजूद काम पूरा नहीं होने पर पटवारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है।
-वेतन विसंगति: लंबे समय से लंबित वेतन संबंधी समस्याओं का निराकरण नहीं होने से नाराजगी।
-पदोन्नति की मांग: पदोन्नति से जुड़े लंबित मामलों का निराकरण करने की मांग।
-लंबित मांगों पर निर्णय: संघ का कहना है कि शासन-प्रशासन को पहले भी समस्याओं से अवगत कराया गया, लेकिन ठोस समाधान नहीं होने के कारण अनिश्चितकालीन आंदोलन का निर्णय लेना पड़ा।