आरंग : छत्तीसगढ़ में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि महज 9 दिनों के भीतर तीसरी बार ईंधन के दाम बढ़ना आम आदमी, किसान, मजदूर, मध्यमवर्गीय परिवारों और छोटे व्यापारियों पर सीधा आर्थिक बोझ है।
डॉ. डहरिया ने बताया कि 15 मई और 19 मई के बाद शनिवार को फिर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। लगातार बढ़ रही कीमतों के कारण रायपुर में पेट्रोल 105 रुपए प्रति लीटर से ऊपर पहुंच गया है, जबकि डीजल करीब 98 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। सरगुजा और बिलासपुर सहित अन्य जिलों में भी ईंधन के दाम लगातार बढ़ रहे हैं।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में पेट्रोल की कीमत 120 रुपए प्रति लीटर से अधिक पहुंच सकती है। इसका असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि घरेलू बजट और बाजार व्यवस्था पर भी व्यापक प्रभाव पड़ेगा।
पूर्व मंत्री ने कहा कि डीजल महंगा होने का सबसे बड़ा असर खेती-किसानी पर पड़ेगा। ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और सिंचाई पंप चलाने की लागत बढ़ने से किसानों की उत्पादन लागत में भारी वृद्धि होगी। पहले से खाद, बीज और डीजल संकट का सामना कर रहे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि मालवाहक वाहनों का किराया बढ़ने से दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल, राशन सामग्री, सीमेंट, लोहा समेत दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं। परिवहन खर्च बढ़ने से बस, ऑटो और स्कूल वाहनों के किराए में वृद्धि की संभावना भी बढ़ गई है।
डॉ. डहरिया ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। एक ओर लोगों की आय नहीं बढ़ रही, वहीं दूसरी ओर रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुएं लगातार महंगी होती जा रही हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार पेट्रोल-डीजल पर टैक्स में राहत देकर कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।