राजनांदगांव :- भाजपा नेता अशोक चौधरी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन की वजह से दिवाली के त्योहार के दौरान व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की हठधर्मिता के कारण व्यापारियों की चिंताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। चौधरी ने कहा कि रामलीला मैदान की क्षमता लगभग 50 हजार से 75 हजार लोगों के ठहरने की बताई जाती है, जबकि इस कार्यक्रम में 10 लाख लोगों को आमंत्रित किए जाने की बात सामने आ रही है। उन्होंने दावा किया कि कार्यक्रम में करीब 20 हजार गाड़ियों के पहुंचने की संभावना है, जिससे रामलीला मैदान के आसपास 8 से 10 किलोमीटर के दायरे में यातायात और व्यापार प्रभावित हो सकता है।
श्री चौधरी ने कहा कि दिवाली और भाई दूज का त्योहार व्यापारियों के लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ती है और छोटे-बड़े व्यापारियों को अपने कारोबार से अच्छी आय की उम्मीद रहती है। ऐसे समय में बड़े राजनीतिक कार्यक्रम के आयोजन से बाजारों में यातायात बाधित होने और ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि व्यापारियों की ओर से राहुल गांधी से अपील की गई है कि वे धरना-प्रदर्शन का कार्यक्रम दिवाली और भाई दूज के बाद किसी अन्य तारीख पर आयोजित करें, ताकि त्योहार के दौरान व्यापारियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। चौधरी के मुताबिक, व्यापारियों की इस चिंता को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि त्योहारों के समय होने वाली बिक्री से ही कई छोटे दुकानदारों और कारोबारियों की सालभर की आर्थिक व्यवस्था जुड़ी रहती है। श्री चौधरी ने राहुल गांधी की राजनीतिक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व सनातन धर्म के त्योहारों और उनसे जुड़े व्यापारिक महत्व को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं देता। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान क्रिसमस से पहले यात्रा स्थगित किए जाने का उदाहरण दिया जाता है, जबकि अब दिवाली के आसपास बड़े कार्यक्रम की तारीख निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि भारत में दिवाली केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था और व्यापारिक गतिविधियों से भी गहराई से जुड़ी हुई है। दिवाली के अवसर पर बाजारों में खरीदारी बढ़ती है, जिससे दुकानदारों, छोटे कारोबारियों, कारीगरों, परिवहन व्यवसायियों और विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को रोजगार मिलता है। श्री चौधरी ने कहा कि दिवाली के दौरान पटाखों, कपड़ों, मिठाइयों, सजावटी सामान, पूजा सामग्री और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की बिक्री में तेजी आती है। इस कारोबार से विभिन्न समुदायों के लोग जुड़े हुए हैं। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि पटाखों के कारोबार में मुस्लिम समुदाय के अनेक व्यापारी भी शामिल हैं। इसी तरह कपड़ा व्यवसाय और अन्य व्यापारिक गतिविधियों से भी अलग-अलग समुदायों के लोगों की आजीविका चलती है। श्री चौधरी ने कहा कि त्योहारों का आर्थिक महत्व किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं है। दिवाली के अवसर पर होने वाला कारोबार समाज के विभिन्न वर्गों को रोजगार और आय के अवसर प्रदान करता है। ऐसे में त्योहार के समय यातायात बाधित होने या बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही कम होने से छोटे व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। श्री चौधरी ने कहा कि राजनीतिक दलों को अपने कार्यक्रम निर्धारित करते समय आम नागरिकों, व्यापारियों और स्थानीय कारोबारियों की सुविधाओं का भी ध्यान रखना चाहिए। लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध और धरना-प्रदर्शन का अधिकार सभी को है, लेकिन इसके साथ ही आम जनता के हितों और त्योहारों के महत्व को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी बड़े कार्यक्रम में लाखों लोगों और हजारों वाहनों के पहुंचने की संभावना है, तो उसके यातायात और आसपास के कारोबार पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन किया जाना चाहिए। चौधरी ने कांग्रेस नेतृत्व से व्यापारियों की मांग पर विचार करने और कार्यक्रम की तारीख दिवाली एवं भाई दूज के बाद निर्धारित करने की अपील की। श्री चौधरी ने कहा कि देश की जनता को राजनीतिक दलों के कार्यों, उनके निर्णयों और आम लोगों के हितों के प्रति उनके दृष्टिकोण का मूल्यांकन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता को यह तय करना है कि वह कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की राजनीति को किस नजरिए से देखती है। उन्होंने नागरिकों से अपने विवेक के आधार पर राजनीतिक दलों के प्रति राय बनाने की अपील करते हुए कहा कि व्यापारियों की आजीविका, त्योहारों की खुशियां और आम जनता की सुविधाएं राजनीति से ऊपर होनी चाहिए।