राजनांदगांव :- छत्तीसगढ़ शासन, राजगामी संपदा के उपाध्यक्ष *मनोज निर्वाणी* ने कहा कि आज 25 जून है। यह वही तारीख है जब 1975 में कांग्रेस सरकार ने देश पर आपातकाल थोपकर भारत की आत्मा को कुचलने का काम किया था।
निर्वाणी परिवार ने भी आपातकाल की यातना झेली है। मेरे परिवार के निर्वाणी बंधु स्व. रामकृष्ण निर्वाणी तथा स्व. हृदय नारायण निर्वाणी, दोनों भाइयों को मीसा (MISA) कानून के तहत जेल में डाल दिया गया था।* उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए जेल की सलाखों के पीछे दिन काटे, लेकिन तानाशाही के सामने सिर नहीं झुकाया।
प्रेस नोट के माध्यम से मैं देशवासियों को याद दिलाना चाहता हूँ:*
1. *25 जून की काली रात:* 25-26 जून 1975 को मात्र अपनी सत्ता बचाने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री ने पूरे देश को जेलखाना बना दिया था। देशवासियों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए, प्रेस की आजादी का गला घोंट दिया गया।
2. *मीडिया पर हमला:* समाचार पत्रों पर सेंसरशिप लगाकर सच बोलने वालों की आवाज दबा दी गई। जो नहीं झुका, उसे जेल में डाल दिया गया।
3. *लोकतंत्र के प्रहरी जेल में:* जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी समेत लाखों राष्ट्रभक्तों को बिना अपराध जेल में ठूंस दिया गया।
4. *सत्ता का दुरुपयोग:* संविधान को ताक पर रखकर, लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या करके केवल एक परिवार की सत्ता बचाने का घृणित प्रयास किया गया।
आज 50 वर्ष बाद भी 25 जून हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र की कीमत क्या होती है। *आओ हम सब संकल्प लें कि देश में फिर कभी ऐसा काला दिन नहीं आने देंगे।*
हम उन सभी लोकतंत्र सेनानियों को नमन करते हैं जिन्होंने आपातकाल के दौरान यातनाएं सहीं, लेकिन संविधान की रक्षा के लिए झुके नहीं।
आपातकाल लोकतंत्र पर सबसे बड़ा धब्बा था - इसे भूलना देश के साथ अन्याय होगा।"*
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