May 22, 2026


अय्याशी के अड्डों के लिए पेड़ों की भी बलि

मनगटा क्षेत्र में 45 एकड़ क्षेत्र में और अवैध प्लाटिंग चिन्हित, दो को नोटिस

राजनांदगांव: अय्याशी का अड्डा बन चुके वन चेतना केंद्र मनगटा क्षेत्र में रिसार्ट, अवैध कालोनी और अन्य निर्माण में न केवल नियमों की अनदेखी की जा रही है, बल्कि इसके लिए वहां हरे पेड़ों की बलि भी चढ़ाई जा रही। एक दिन पहले ग्राम बघेरा और झुराडबरी के बीच जिस डेढ़ सौ एकड़ क्षेत्र में अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाया गया, वहां सैकड़ोंं पेड़ काटे गए हैं। साथ ही प्रशासन ने वहां लगभग 45 एकड़ क्षेत्र में और अवैध प्लाटिंग चिन्हित की है। इनमें एक मनगटा व दूसरा उसी से लगा जोरातरई गांव का है। दोनों भू-स्वामियों को नोटिस जारी किया गया है। शीघ्र ही वहां भी बुलडोजर कार्रवाई की बात कही जा रही है।

मनगटा और वन क्षेत्र से लगे आसपास के गांवों में अभी लगभग 250 रिसोर्ट हैं। वहां आए दिन अनैतिक गतिविधियों की शिकायत आ रही है। समय-समय पर प्रशासन स्वयं कार्रवाई भी कर रहा है। इस बीच क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग भी जोरों पर है। निजी और कृषि भूमि पर बिना किसी अनुमति-अनुज्ञा के निर्माण कराए ही जा रहे हैं। शासकीय जमीन भी दबाई जा रही है।

बघेरा और झुराडबरी के बीच लगभग डेढ़ सौ एकड़ क्षेत्र में भू-माफिया मार्डन मिनी सिटी बसाने जा रहे थे। बिना किसी अनुमति के वहां मैरिज हाल, चारों तरफ सड़क, स्वीमिंग पुल, गार्डन और आकर्षक प्रवेश द्वार के साथ ही सर्वसुविधायुक्त आवासीय परिसर की योजना पर दिन-रात काम कराया जा रहा था। दलालों के माध्यम से दुर्ग और भिलाई क्षेत्र के लोगों ने इसके लिए बड़ी राशि निवेश कर रखी है। एक दिन पहले प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई के बाद अब प्रश्न खड़े हो रहे हैं कि आखिर एक ही क्षेत्र में जमीन के इतने टुकड़ों की रजिस्ट्री के दौरान भू-माफियों की प्लानिंग का पता कैसे नहीं चला। राजस्व विभाग का मैदानी अमला तब क्या कर रहा था?

नोटिस से आगे नहीं बढ़ी कोई कार्रवाई

अवैध प्लाटिंग के खिलाफ लगातार कार्रवाई के बीच उसकी सार्थकता पर प्रश्न चिन्ह भी लगने लगे हैं। लगभग चार माह पहले प्रशासन ने रामदरबार चौक से लगे क्षेत्र में 30 एकड़ में अवैध प्लाटिंग पर बुलडोजर कार्रवाई की थी। उसके बाद पार्रीकला क्षेत्र में भी बुलडोजर चलवाया गया था। इसके अतिरिक्त शहर के कई क्षेत्रों में भी इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। सभी में नोटिस जारी किया गया था, लेकिन अब तक किसी में भी एफआइआर नहीं कराई गई। ऐसे में प्रशासनिक कार्रवाई की सार्थकता पर गंभीर सवाल उठने लगा है। हालांकि मनगटा वाले मामले में एसडीएम ने एफआइआर के लिए कलेक्टर को प्रतिवेदन भेज दिया है।


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