राजनांदगांव : स्थानीय समस्याओं में समाधान तलाशकर युवा सफल स्टार्टअप खड़े कर सकते हैं। कृषि प्रसंस्करण, डिजिटल कृषि और खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में भी उद्यमिता की व्यापक संभावनाएं हैं। यह बात मंगलवार को शासकीय दिग्विजय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित व्याख्यान में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के आरकेवीवाइ-रफ्तार एग्रीबिजनेस इन्क्यूबेटर के सीओओ आशीष वर्मा ने कही।
'सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज' के तहत आयोजित कार्यक्रम में 147 विद्यार्थियों ने स्टार्टअप, बिजनेस माडल, इन्क्यूबेशन, मेंटरशिप और फंडिंग की प्रक्रिया समझी। वर्मा ने 'इग्नाइट योर स्टार्टअप आइडिया' विषय पर व्याख्यान देते हुए बताया कि नवाचारी विचार को तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहयोग से सफल व्यवसाय में बदला जा सकता है।
वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कृषि प्रसंस्करण सहित स्मार्ट कृषि और डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में नए उद्यम विकसित किए जा सकते हैं। प्राचार्य डा. सुचित्रा गुप्ता ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल रोजगार पाने तक सीमित न रहकर रोजगार सृजक बनने की दिशा में प्रयास करना चाहिए। इन्क्यूबेशन सेल के समन्वयक डा. संजय ठिसके ने सेवा, नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से समाजोपयोगी समाधान विकसित करने पर जोर दिया। कार्यक्रम में वाणिज्य विभागाध्यक्ष डा. एसके उके, प्रज्ञा मिश्रा सहित विभिन्न विभागों के प्राध्यापक उपस्थित रहे। विद्यार्थियों ने स्टार्टअप और कृषि उद्यमिता से जुड़े सवाल पूछकर विशेषज्ञ से मार्गदर्शन प्राप्त किया। संचालन लिकेश्वर सिन्हा ने किया और आभार वंदना मिश्रा ने व्यक्त किया।