February 07, 2026


क्या है वह केस जिसमें पूर्णिया सांसद पप्पू यादव को आधी रात को ले गई पुलिस, 3 घंटे चला हाई-वोल्टेज ड्रामा

पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को गर्दनीबाग पुलिस ने करीब 31 साल पुराने एक मामले में शुक्रवार की आधी रात को गिरफ्तार कर लिया। मंदिरी स्थित आवास पर गिरफ्तारी के पहले करीब ढाई घंटे तक तनातनी की स्थिति रही।

पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए डटी रही और उधर, सांसद और उनके समर्थक अड़े रहे। गिरफ्तारी के दौरान उनके समर्थकों ने पुलिस को रोकने की कोशिश भी की। अंतत: रात 12 बजे पुलिस उन्हें गाड़ी में बैठाकर चिकित्सकीय जांच के लिए आईजीआईएमएस ले गई।

पुलिस के मुताबिक यह मामला पटना के गर्दनीबाग थाना (कांड संख्या 552/95) का वर्ष 1995 का है, जिसमें कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी है। पुलिस की विशेष टीम इसी का तामिला कराने रात करीब साढ़े नौ बजे मंदिरी पहुंची थी। पप्पू यादव इस बात पर अड़ गये कि उनकी तबियत ठीक नहीं है और वह नहीं जायेंगे। उन्हें दवाएं दी गईं। आधी रात तक दोनों पक्षों में रस्साकशी और मान-मनौव्वल चलता रहा। गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव ने इसे राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई बताया और जान पर खतरे की आशंका भी जताई।

क्या है मामला

शिकायतकर्ता विनोद बिहारी लाल ने आरोप लगाया था कि उनका मकान धोखाधड़ी के जरिए किराये पर लिया गया। इस मामले में तीन दिन पहले ही संपत्ति कुर्की का आदेश एमपीएमएलए कोर्ट ने दिया था। काफी लंबे समय से इस मामले में अदालती कार्यवाही चल रही है। कोर्ट के समन के बावजूद वह उपस्थित नहीं हो रहे थे। इसी वजह से कोर्ट ने वारंट जारी किया था।

गिरफ्तारी से पूर्व हाई-वोल्टेज ड्रामा,प्रदर्शन

धोखाधड़ी से मकान किराया पर लेने और धमकी देने के मामले में शुक्रवार रात करीब साढ़े नौ बजे पटना पुलिस की टीम पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को गिरफ्तार करने उनके उत्तरी मंदिरी आवास पर पहुंची। इस दौरान ढाई घंटे तक हाई-वोल्टेज ड्रामा हुआ।

पुलिस पप्पू यादव को गिरफ्तार करने की कोशिश करती रही। इस दौरान समर्थकों और पुलिस अधिकारियों में तीखी बहस हुई। इंस्पेक्टर दीपक कुमार ने समर्थकों से उनके काम में सहयोग करने का आग्रह किया। हालांकि समर्थक वारंट की कॉपी देखने पर अड़े रहे। पप्पू यादव कहते रहे कि मैं बीमार हूं। रात में दवा लेकर सोता हूं, मैं कहीं नहीं जाऊंगा, आप सुबह आइए फिर चलूंगा, लेकिन पुलिस कुछ सुनने को तैयार नहीं थी। उन्हें गिरफ्तार करने के लिए सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह, सचिवालय डीएसपी अनु कुमारी, कोतवाली, बुद्धा कॉलोनी और गर्दनीबाग थाने की पुलिस पहुंची थी।


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