October 23, 2026


शरद पूर्णिमा पर सत्यनारायण मंदिर में 105 वीं बार खीर महाप्रसाद

25 अक्टूबर को दुग्धाभिषेक, कथा-भजन संध्या और मध्यरात्रि में प्रसाद वितरण

राजनांदगांव। संस्कारधानी राजनांदगांव के श्री सत्यनारायण मंदिर में शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर 25 अक्टूबर को विविध धार्मिक आयोजन होंगे। प्रातः भगवान श्री सत्यनारायण का दुग्धाभिषेक, कथा एवं महाआरती के साथ रात्रि में स्वरांजलि भजन संध्या ग्रुप की सुमधुर भक्ति संध्या आयोजित की जाएगी। मंदिर समिति द्वारा विगत 105 वर्षों से शरद पूर्णिमा पर खीर महाप्रसाद वितरण की परंपरा निरंतर निभाई जा रही है।

मंदिर समिति के अध्यक्ष हरीश अग्रवाल ने बताया कि शरद पूर्णिमा आश्विन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस रात्रि चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है तथा चांदनी में रखी खीर का विशेष महत्व है। इसी आस्था के साथ मंदिर में प्रतिवर्ष श्रद्धापूर्वक आयोजन किया जाता है।

सुबह दुग्धाभिषेक और सत्यनारायण कथा

मंदिर समिति के उत्सव प्रभारी लक्ष्मण लोहिया, श्याम खंडेलवाल, राजेश अग्रवाल, बालाजी एवं विजय खंडेलवाल ने बताया कि 25 अक्टूबर को प्रातः 9 से 10 बजे तक श्रद्धालुओं द्वारा भगवान श्री सत्यनारायण का दुग्धाभिषेक किया जाएगा। इसके पश्चात भक्तों को भगवान के श्रृंगार दर्शन होंगे। प्रातः 10:30 बजे आचार्य कालू महाराज द्वारा श्री सत्यनारायण भगवान की कथा सुनाई जाएगी। भगवान को भोग अर्पित करने के पश्चात महाआरती के साथ धार्मिक कार्यक्रम संपन्न होगा।

रात 8 बजे से भजन संध्या, मध्यरात्रि में खीर प्रसाद

  कोषाध्यक्ष सुरेश अग्रवाल, भवन व्यवस्था प्रभारी नीतीश अग्रवाल ने बताया कि शरद पूर्णिमा की शीतल चांदनी में रात्रि 8 बजे से स्वरांजलि भजन संध्या ग्रुप द्वारा भक्ति संध्या प्रस्तुत की जाएगी। इसमें भजन गायक जितेंद्र भाई एवं गोपाल भाई सुमधुर भजनों की प्रस्तुति देंगे। भक्ति संगीत से मंदिर परिसर भक्तिमय होगा और श्रद्धालु भजनों के माध्यम से प्रभु भक्ति में सराबोर होंगे।

रात्रि 12 बजे भगवान श्री सत्यनारायण की महाआरती के पश्चात श्रद्धालुओं को अमृतमयी खीर महाप्रसाद का वितरण किया जाएगा। समिति द्वारा 105 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को आस्था, सेवा और धार्मिक समरसता का प्रतीक बताया गया।

शरद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

मंदिर समिति के कार्यकारिणी सदस्य विष्णु लोहिया एवं जुगल किशोर अग्रवाल ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान माता महालक्ष्मी प्रकट हुई थीं। सुख-समृद्धि की कामना से इस दिन माता लक्ष्मी की आराधना की जाती है तथा इसे कोजागरी व्रत के रूप में भी मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने इसी पूर्णिमा की रात्रि गोपियों के साथ महारासलीला की थी।

मंदिर समिति के सह सचिव रामावतार जोशी एवं पवन लोहिया ने श्रद्धालुओं से आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर धर्मलाभ लेने का अनुरोध किया है।

उपरोक्त जानकारी मंदिर समिति के सचिव सौरभ खंडेलवाल एवं उत्सव प्रभारी लक्ष्मण लोहिया ने दी।



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