October 23, 2026


पूर्वजों के त्याग और वीरता से परिचित होंगी नई पीढ़ियां

राजनांदगांव: राजपूत क्षत्रिय महासभा छत्तीसगढ़ द्वारा 24 अक्टूर को समाज की एकता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने विजयादशमी कार्यक्रम एवं एकता रैली आयोजित किया जाएगा। महासभा का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के विभिन्न राजपूत संगठनों को एक मंच पर लाकर सामाजिक एकता को मजबूत करना और पूर्वजों के त्याग, बलिदान एवं वीरता की गाथाओं को भावी पीढ़ी तक पहुंचाना है। बुधवार को प्रेसवार्ता में समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में इस संगठन से लगभग 30 हजार लोग जुड़े हुए हैं, जबकि राजनांदगांव में करीब 5 हजार लोग संगठन से जुड़े हैं। महासभा के अनुसार, प्रदेश में राजपूत समाज के लगभग 34 से 35 संगठन सक्रिय हैं, जिनमें से 24 पंजीकृत हैं। इन संगठनों की अपनी अलग-अलग शाखाएं, रीति-रिवाज और परंपराएं हैं, लेकिन सभी की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक पहचान एक समान है।राजपूत समाज के सभी संगठनों की सांस्कृतिक विरासत और गौरवशाली इतिहास साझा है। समाज महाराणा प्रताप के आदर्शों को मानता है और वीरता, त्याग एवं बलिदान की परंपरा को महत्व देता है। महासभा का उद्देश्य इन ऐतिहासिक मूल्यों और पूर्वजों के साहस से नई पीढ़ी को परिचित कराना है, ताकि युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझे और उससे प्रेरणा ले सके।

एक मंच पर आने से मजबूत होगी सामाजिक एकता

महासभा का कहना है कि अलग-अलग संगठनों में बंटे रहने से समाज की सामूहिक शक्ति का प्रभाव कम दिखाई देता है। यदि सभी संगठन एकजुट होकर एक मंच पर आएं, तो समाज की एकता और ताकत को व्यापक रूप से प्रदर्शित किया जा सकता है। इसी सोच के साथ सभी राजपूत संगठनों को एक सूत्र में पिरोने की पहल की जा रही है। महासभा का संदेश है कि समाज की वास्तविक ताकत आपसी एकता में निहित है। “एकता में ही ताकत होती है” के नारे के साथ संगठन ने सभी राजपूत संगठनों को एकजुट होकर साझा सांस्कृतिक विरासत और गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।



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