राजनांदगांव: खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (केसीजी) में विजयादशमी यानी दशहरा के सिर्फ एक ही दिन में शराब की बिक्री में ऐतिहासिक उछाल आया है। शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों के कड़े संयम के बाद, जिले भर के मदिरा प्रेमियों ने महज 12 घंटे के भीतर एक करोड़ छह लाख रुपये से अधिक की शराब गटक ली। भौगोलिक दृष्टि से बेहद सीमित दायरा और कम आबादी होने के बावजूद, पूरे जिले में एक ही दिन के भीतर शराब बिक्री का यह बड़ा आंकड़ा आबकारी विभाग सहित हर किसी को हैरान कर रहा है।
नवरात्र के पावन पर्व के दौरान पूरे केसीजी जिले की शराब दुकानों में सन्नाटा पसरा हुआ था। आम जनता ने मां दुर्गा की भक्ति में लीन होकर मदिरा से पूरी तरह दूरी बना रखी थी, जिससे दुकानों के काउंटर लगभग सूने पड़े थे। लेकिन जैसे ही दशहरे के दिन सुबह दुकानों के शटर उठे, मानो मदिरा प्रेमियों का सब्र का बांध टूट गया। जिला मुख्यालय खैरागढ़ से लेकर छुईखदान और गंडई के ग्रामीण अंचलों तक की शराब दुकानों के सामने ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और काउंटरों पर नोटों की बंपर बारिश होने लगी।
दुकानवार बिक्री के आंकड़े रुपये में
खैरागढ़-9,15,110
छुईखदान-17,99,690
गंडई-19,87,240
मुढ़ीपार-5,50,250
साल्हेवारा-3,84,250
जालबंधा-11,26,340
पैलीमेटा-2,90,040
प्रीमियम खैरागढ़-5,66,960
ठेलकाडीह-10,35,200
पाड़ादह-6,29,150
कुल बिक्री योग- 1,06,55,110
छोटे जिले का बहुत बड़ा धमाका
केसीजी भले ही प्रदेश के सबसे नए और छोटे जिलों में से एक है, लेकिन त्योहार के उल्लास और जश्न के माहौल में यहां के शौकीनों ने मदिरा खरीदी के सारे रिकार्ड तोड़ दिए। जानकारों के मुताबिक, दशहरे के पावन अवसर पर रावण दहन के बाद होने वाले पारिवारिक आयोजनों, दोस्तों की महफिलों और सामूहिक पार्टियों के कारण शराब की मांग में यह अप्रत्याशित उछाल देखा गया। आलम यह था कि मांग इतनी ज्यादा बढ़ गई कि दुकानों पर कुछ ही घंटों के भीतर कई ब्रांड्स का स्टाक पूरी तरह खाली होने की नौबत आ गई।
शांतिपूर्ण ढंग से हुई बिक्री
जिला आबकारी अधिकारी ने महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि दशहरा के रोज जिले में किसी भी प्रकार की अवैध शराब की बिक्री या तय कीमत से अधिक दाम पर शराब बेचे जाने का कोई मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग की कड़ी निगरानी के चलते पूरे जिले में बेहद शांतिपूर्ण तरीके से शराब की बिक्री संपन्न हुई है। इस एक दिन के ऐतिहासिक आंकड़े ने जहां शासन के राजस्व में भारी बढ़ोतरी दर्ज की है, वहीं यह भी साफ कर दिया है कि जिला छोटा होने के बावजूद यहां त्योहारों पर जश्न का माहौल बेहद बड़ा होता है।