राजनांदगांव: श्रमिकों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है, लेकिन प्रक्रिया की उलझनों और बैंकों की कथित उदासीनता के चलते हितग्राहियों की राह आसान नहीं हो पा रही है। श्रम विभाग के अंतर्गत संचालित ई-रिक्शा योजना में पात्र श्रमिक ऋण स्वीकृति के लिए इंतजार कर रहे हैं। जिले में करीब 52 फाइलें बैंकों में लंबित पड़ी हैं। वहीं, श्रमिक कार्ड के आवेदन भी स्वीकृति के लिए अटके हुए हैं। ऐसे में रोजगार शुरू करने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की उम्मीद लगाए श्रमिकों को सीएससी सेंटरों से लेकर श्रम विभाग तक चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
केंद्र और राज्य शासन की ओर से श्रमिक वर्ग को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से ई-रिक्शा योजना संचालित की जा रही है। इसके तहत श्रम विभाग में पंजीकृत पात्र श्रमिकों को बैंक के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराकर ई-रिक्शा दिलाने की व्यवस्था है, ताकि वे स्वयं का रोजगार शुरू कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकें। हालांकि, जिले में योजना के क्रियान्वयन के दौरान बैंक स्तर पर अड़चनें सामने आ रही हैं। हितग्राहियों की शिकायत है कि कई आवेदनों को बिना स्पष्ट कारण निरस्त किया जा रहा है, अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा रहे हैं और कुछ फाइलें लंबे समय से लंबित हैं। इससे पात्रता रखने के बावजूद श्रमिक योजना का लाभ पाने के लिए परेशान हो रहे हैं।
श्रमिकों की परेशानी केवल ई-रिक्शा ऋण तक सीमित नहीं है। श्रम विभाग में श्रमिक कार्ड बनवाने के लिए किए गए आनलाइन आवेदन भी लंबित होने की शिकायत सामने आ रही है। जिले में सीएससी और च्वाइस सेंटरों के माध्यम से संगठित एवं असंगठित श्रमिक कार्ड के लिए आवेदन किए जा रहे हैं। श्रमिकों का कहना है कि जरूरी दस्तावेज अपलोड करने के बावजूद उनके आवेदनों को स्वीकृति नहीं मिल रही है। आवेदनों में त्रुटि बताकर उन्हें रोक दिया जाता है। इसके पीछे आवेदक की फोटो, ठेकेदार की सील और हस्ताक्षर अथवा स्वघोषणा पत्र जैसी कमियां बताई जा रही हैं। वहीं, आवेदकों का कहना है कि दस्तावेज पूरे करने के बाद भी आवेदन स्वीकृत नहीं होने से उन्हें बार-बार जानकारी लेने पहुंचना पड़ता है। इससे समय और श्रम दोनों बर्बाद हो रहे हैं।
सीएससी सेंटर और श्रम विभाग के बीच पिस रहे श्रमिक
जिले में बड़ी संख्या में सीएससी और च्वाइस सेंटर संचालित हैं, जहां से श्रमिक कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जाते हैं। सेंटर संचालकों के अनुसार, आवेदन पूरे कर दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन अपलोड किए जा रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी कई आवेदन लंबित रह जाते हैं। प्रत्येक सेंटर पर तीन से चार आवेदन लंबे समय से अटके होने की बात कही जा रही है। जिले में तीन हजार से अधिक सीएससी और च्वाइस सेंटर होने के दावे के बीच लंबित आवेदनों की समस्या श्रमिकों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। आवेदन की स्थिति जानने के लिए श्रमिक कभी सीएससी सेंटर तो कभी श्रम विभाग पहुंच रहे हैं। विभाग से जानकारी मिलने के बावजूद समस्या का निराकरण नहीं होने की शिकायत है। रोजगार और श्रमिक हितों से जुड़े कार्यों के लिए उन्हें अपनी मजदूरी छोड़कर कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी भी बढ़ रही है।
योजना का उद्देश्य कैसे होगा पूरा?
ई-रिक्शा ऋण और श्रमिक कार्ड के आवेदन लंबित रहने से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं। आवेदकों का कहना है कि बैंक लंबित ऋण प्रकरणों की समीक्षा कर पात्र हितग्राहियों को स्पष्ट कारण बताते हुए समय पर निर्णय लें। वहीं, श्रम विभाग आवेदन में कमी होने पर आवेदकों को समय रहते इसकी जानकारी देकर सुधार का अवसर उपलब्ध कराए, ताकि अनावश्यक चक्कर लगाने की स्थिति न बने।