राजनांदगांव: उचित मूल्य की दुकानों से खाद्यान्न का उठाव नहीं कर पाने वाले हजारों उपभोक्ता अब राहत आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। स्थिति यह है कि जिले के लगभग 20 हजार गरीब परिवार अप्रैल, मई और जून माह का राशन अब तक प्राप्त नहीं कर सके हैं। पीडीएस दुकानों में समय पर खाद्यान्न का उठाव न होने के कारण वितरण प्रक्रिया प्रभावित हुई है। कई दुकानों पर उपभोक्ताओं को राशन उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, जिससे जरूरतमंद परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि वे लगातार दुकानों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल नए आदेश की प्रतीक्षा करें जैसी जानकारी दी जा रही है।
जिले में कुल राशनकार्डधारियों की संख्या लगभग 2 लाख 55 हजार बताई जा रही है, जबकि इन कार्डों से जुड़े लाभार्थियों की संख्या करीब नौ लाख के आसपास है। ऐसे में बड़ी आबादी सीधे तौर पर इस वितरण व्यवस्था पर निर्भर है। तीन माह का खाद्यान्न नहीं मिलने से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्थिति लगभग समान बताई जा रही है। कई स्थानों पर लोगों ने आरोप लगाया है कि समय पर सूचना नहीं मिलने और व्यवस्था में स्पष्टता की कमी के कारण वे अपने हक के राशन से वंचित रह गए हैं।
संचालकों ने खींचे हाथ
वहीं, पीडीएस संचालकों का कहना है कि उन्हें भी उच्च स्तर से स्पष्ट निर्देश या राहत आदेश का इंतजार है, जिसके बिना वे वितरण नहीं कर पा रहे हैं। स्थिति को देखते हुए लाभार्थियों में असंतोष बढ़ रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब खाद्यान्न पात्रता तय है तो समय पर वितरण क्यों नहीं हो पाया। अब सभी की नजरें प्रशासनिक स्तर पर जारी होने वाले राहत आदेश पर टिकी हैं, जिसके बाद ही प्रभावित परिवारों को उनके बकाया राशन मिलने की उम्मीद है। फिलहाल, पूरे मामले में प्रशासनिक निर्णय का इंतजार किया जा रहा है, जबकि हजारों परिवार रोजमर्रा की जरूरतों के लिए खाद्यान्न संकट से जूझ रहे हैं।