दंतेवाड़ा/बचेली :कारगिल विजय दिवस के अवसर पर दंतेवाड़ा जिले के बचेली स्थित "आमोद अरण्य" में देशभक्ति और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम देखने को मिला। वर्ष 2019 में पांच पर्यावरण प्रेमियों संदीप दीक्षित, सीमा अमलेंदु चक्रवर्ती, सुमित सरकार एवं अशोक नदी द्वारा आधा एकड़ बंजर भूमि पर "एक पेड़ शहीदों के नाम" अभियान की शुरुआत की गई थी, जो आज एक विशाल जनआंदोलन का रूप ले चुका है।
हर वर्ष कारगिल दिवस पर यहां देश के वीर शहीदों की स्मृति में वृक्षारोपण किया जाता है। इस अभियान का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उनका संरक्षण कर आने वाली पीढ़ियों तक शहीदों की स्मृतियों को जीवित रखना है।
इस अभियान को नई पहचान तब मिली जब संदीप दीक्षित की पुत्री नंदिनी दीक्षित इससे जुड़ीं। उनके प्रयासों से "आमोद अरण्य" को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। नंदिनी दीक्षित को युवा सांसद सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
अभियान की सबसे अनूठी पहल वर्ष 2023 में शुरू हुई, जब संदीप दीक्षित अपने परिवार के साथ कारगिल जाकर शहीद स्मारक की पवित्र मिट्टी लेकर आए। इस मिट्टी को एक कलश में सुरक्षित रखा गया है। अब देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले कारगिल शहीदों के घरों से मिट्टी लाकर उसी कलश में मिलाई जाएगी। इसके बाद जिस शहीद के घर की मिट्टी आएगी, उसे उसके नाम से लगाए गए वृक्ष की जड़ों में अर्पित किया जाएगा। इस तरह प्रत्येक वृक्ष अपने आप में एक जीवंत स्मारक बनेगा।
कारगिल विजय दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में देशभक्ति गीतों के बीच शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा बड़ी संख्या में लोगों ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में वन परिक्षेत्र अधिकारी परितेश पांडे, थाना प्रभारी अर्जुन पटेल, छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार संघ दंतेवाड़ा के जिला अध्यक्ष आज़ाद सक्सेना, बैलाडीला पत्रकार संघ के अध्यक्ष जितेंद्र चौधरी, नगर पालिका अध्यक्ष राजू जायसवाल, भारतीय जनता पार्टी मंडल अध्यक्ष अमरेंद्र चक्रवर्ती सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे।
आयोजकों ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल पेड़ लगाना नहीं, बल्कि प्रत्येक पौधे को शहीदों की स्मृति से जोड़कर उसका संरक्षण करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां प्रकृति और राष्ट्रभक्ति दोनों का महत्व समझ सकें। पांच लोगों द्वारा शुरू की गई यह छोटी-सी पहल आज एक प्रेरणादायी अभियान बन चुकी है, जिससे लगातार लोग जुड़ रहे हैं और देश के वीर सपूतों को हरियाली के माध्यम से सच्ची श्रद्धांजलि दे रहे हैं।