राजनांदगांव: विकास कार्यों के लिए स्वीकृति का रोना रोने वाला नगर निगम पिछले एक वर्ष से राशि मिलने के बाद भी सड़कों के डामरीकरण के लिए ठेकेदारों के सामने हाथ बांधे खड़ा है। 10 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिलने के बाद भी निगम की 41 में से सात सड़कों का डामरीकरण अधूरा है और इन्हें पूरा करने सिर्फ 13 दिन का समय बचा है। इसके बाद वर्षाकाल शुरु हो जाएगा जिसमें डामरीकरण नहीं किया जाता। यह स्थिति ठेकेदारों की आनाकानी और बेपरवाही के चलते बनी है। इसके बाद भी निगम प्रशासन इस पर प्रभावी कार्रवाई करने की स्थिति में नजर नहीं आ रहा है। परिणा स्वरूप 15 जून से शुरु होने वाले मानसून सत्र के बाद फिर चार महीनों तक सड़कों का काम नहीं किया जा सकेगा।
सड़क डामरीकरण के मामले में निगम का रवैया शुरु से ही हीलहवाला रहा है और अब पूर्व में ब्लैक लिस्टेड ठेकेदारों को दोबारा काम सौंप दिया गया। वर्ष 2025-26 के दौरान ये ठेकेदार कभी भुगतान न किए जाने तो कभी और कारणों से काम अटकाए रहे। कार्रवाई के नाम पर निगम ने पैकेज टैंडर निरस्त किए और दोबारा टेंडर करने में ही तीन महीने से अधिक का समय लिया और इसके बाद भी सड़कों का डामरीकरण शुरु नहीं किया गया। अब वर्षाकाल के करीब आते ही फिर निगम प्रशासन ठेकेदारों पर दबाव बनाने की बजाए उनसे डामरीकरण के लिए बातचीत से रास्ता ढूंढ रहा है। डामरीकरण के लिए शासन से जो राशि मिली है, उससे चिन्हिंत में से 28 पर तो डामरीकरण करा लिया गया लेकिन शेष पर पहले तकनीकी और बाद में डामर का भाव बढ़ने से व्यवहारिक दिक्कतें आई।
कार्रवाई की चिंता नहीं, शर्तें थोप रहे ठेकेदार
शहर में शेष सड़कों के डामरीकरण का कार्य ठेकेदार एवी कंस्ट्रक्शन, मोहन कंस्ट्रक्शन, मे. अभय कोटडि़या, क्वालिटी कंट्रक्शन के पास है। इनमें से वर्तमान में कौरिनभांठा की 55 लाख की लागत की छह सड़कों का डामरीकरण का क्वालिटी कंस्ट्रक्शन द्वारा किया जा रहा है। डेढ़ करोड़ के कार्य अब भी शेष हैं। बकि शेष ठेकेदार क्षतिपूर्ति घोषणा के बाद भी डामर महंगा होने और उपलब्धता न होने का हवाला देकर डामरीकरण के लिए शर्तें थोप रहे हैं। ठेकेदारों को निगम की कार्रवाई की भी कोई चिंता नहीं है।
वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे प्रशासन: ओस्तवाल
शहर कांग्रेस के पूर्व महामंत्री हेमंत ओस्तवाल का आरोप है कि डामरीकरण को लेकर निगम के अधिकारी गोलमोल बातें कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि 41 में 27 सड़कों का काम हो गया है। 14 ही शेष है। ऐसे में स्पष्ट करना चाहिए कि किन सड़कों का काम हो गया और कहां का बचा है। सच्चाई क्या है? इसको कलेक्टर को आम जनता के सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन ठेकेदारों को काली सूची में डाला गया है, महापौर मधुसूदन यादव उनसे काम शुरू करने के लिए निवेदन कर रहे हैं। हेमंत का आरोप है कि गुणवत्ताहीन सडक़ निर्माण करने वाले ठेकेदारों ने करोड़ों रूपयों का भ्रष्टाचार किया है।
सभी को जानकारी दी है
एक ठेकेदार ने काम शुरू किया है। बाकी ठेकेदारों को भी बारिश से पहले काम पूरा करना है। सभी को इस संबंध में जानकारी दे दी गई है। समय पर काम पूरा नहीं करने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।
अतुल विश्वकर्मा, आयुक्त, नगर निगम