November 02, 2026


भाजपा की पदयात्रा में उमड़ी भीड़ अराजकता के खिलाफ नारों से गूंजा शहर

लोकतंत्र की जय जयकार, कांग्रेसी झूठ का पर्दाफाश

राजनांदगांव। 1 नवम्बर, भारतीय जनता पार्टी द्वारा संचालित "लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ”* अभियान के अंतर्गत आज राजनांदगांव में भव्य पदयात्रा निकाली गई। पदयात्रा में जिलेभर से बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता शामिल हुए। पदयात्रा का शुभारंभ स्टेट हाई स्कूल परिसर से हुआ, जहां जिलेभर से पहुंचे कार्यकर्ताओं का एकत्रीकरण हुआ। इसके पश्चात पदयात्रा मानव मंदिर चौक, सिनेमा लाइन एवं भारत माता चौक होते हुए गंज चौक पहुंची, जहां यह एक विशाल सभा में परिवर्तित हो गई। पदयात्रा के दौरान कार्यकर्ताओं में कांग्रेस के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश एवं उत्साह देखने को मिला। हाथों में तख्तियां लेकर कार्यकर्ता लोकतंत्र के सम्मान और अराजकता के विरोध में नारे लगाते हुए चल रहे थे। तख्तियों पर *“हिंसा और तोड़फोड़ नहीं चलेगी”, “लोकतंत्र का सम्मान, अराजकता का बहिष्कार”* जैसे संदेश लिखे हुए थे। पदयात्रा के माध्यम से भाजपा नेताओं ने आम जनता के बीच जनजागरण करते हुए विपक्ष की राजनीति पर सवाल उठाए।

   गंज चौक में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए भाजपा जिला अध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत, महापौर मधुसून यादव एवं अभियान के जिला संयोजक खूबचंद पारख ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसान आंदोलन से लेकर लोकतंत्र एवं संविधान बचाने के तथाकथित आंदोलनों के नाम पर देश में भ्रम और हिंसा का वातावरण निर्मित करने का प्रयास कर रही है। विपक्ष का उद्देश्य जनहित के मुद्दों को उठाना नहीं, बल्कि आंदोलनों की आड़ में देश में अस्थिरता पैदा कर सत्ता हासिल करना है।

 भाजपा नेताओं ने कहा कि नेपाल, फ्रांस एवं बांग्लादेश जैसे देशों की घटनाओं का उदाहरण देते हुए विपक्ष सड़क और भीड़ की राजनीति के माध्यम से देश में हिंसक माहौल बनाने का प्रयास कर रहा है। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन विरोध के नाम पर हिंसा, तोड़फोड़ और संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। भाजपा के करोड़ों कर्मठ कार्यकर्ता विपक्ष की ऐसी मंशा को कभी सफल नहीं होने देंगे और जनता के सामने उसकी राजनीति को बेनकाब करेंगे।

 सभा को संबोधित करते हुए सांसद संतोष पांडे ने अपने विशिष्ट अंदाज में कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि राफेल, हिंडनबर्ग और देश में लगातार चुनावी पराजयों के बाद कांग्रेस अब संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत की चुनाव व्यवस्था विश्व की सबसे बड़ी और मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक है। देश में लगभग 140 करोड़ की आबादी, 96 करोड़ मतदाता और 12 लाख मतदान केंद्र हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था की व्यापकता और मजबूती को दर्शाते हैं। निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष एवं निर्बाध रूप से संपन्न कराया जाता है, जिसकी प्रशंसा पूरी दुनिया करती है।

 सभा के मुख्य वक्ता के रूप में शामिल भाटापारा के पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग, एसआईआर (SIR) को लेकर भ्रम फैलाने और विभिन्न आंदोलनों के माध्यम से चुनाव व्यवस्था पर सवाल खड़े करने का प्रयास देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला है। उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल में आज ही के दिन हुए निर्दोष सिखों के नरसंहार का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की भूमिका की कड़ी आलोचना की,शर्मा ने कार्यकर्ताओं एवं आम जनता से आह्वान किया कि लोकतंत्र की गरिमा, संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा और देश की एकता-अखंडता बनाए रखने के लिए सजग रहें। उन्होंने कहा कि जनता आने वाले चुनावों में कांग्रेस को उसकी नकारात्मक एवं अराजक राजनीति का करारा जवाब देगी।

कार्यक्रम मे भाजपा के वरिष्ठ नेता अशोक शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष रामजी भारती,जिला संगठन प्रभारी जितेंद्र वर्मा, सचिन बघेल, रमेश पटेल, योगेश दत मिश्रा, शशिकांत द्विवेदी, पूर्णिमा साहू,राजेंद्र गोलछा, तरुण लहरवानी, सौरभ कोठारी, डिकेश साहू, पारस वर्मा,रविंद्र वैष्णव, रमन डोंगरे,अंजू त्रिपाठी, एमडी ठाकुर,  किरण वैष्णव रेखा मेश्राम, दिनेश गांधी, मनोज निर्वाणी, रामकुमार गुप्ता,मूलचंद भंसाली, रूपचंद भीमनानी,हरीश शर्मा, राजा माखीजा, त्रिगुण टांक, मुकेश बघेल, सावन वर्मा,रघुवीर वादवा सहित हजारो कार्यकर्ता उपस्थित थे

भाजपा की इस पदयात्रा में कार्यकर्ताओं का उत्साह और बड़ी संख्या में नागरिकों की सहभागिता देखने को मिली। पदयात्रा के माध्यम से भाजपा ने लोकतंत्र के सम्मान, शांति एवं व्यवस्था बनाए रखने तथा अराजकता के विरुद्ध जनजागरण का संदेश दिया।

 पदयात्रा के आयोजन में प्रभारी मधुसूदन यादव के साथ उनकी आयोजन समिति में मोनू बहादुर सिंह, किरण साहू,जागृति यदु, संजय सिन्हा, रंजीता पड़ौती, राजेश श्यामकर, देवेंद्र साहू ने बड़ी भूमिका निभाई । साथ ही मंडल अध्यक्ष गोलू गुप्ता, सुमित भाटिया, खिलेश्व२ साह,मनोज साहू, युवा मोर्चा से चिन्टु सोनकर, महिला मोर्चा से पुष्पा गायकवाड, किसान मोर्चा से दादुराम सोनकर, पिछड़ा मोर्चा से दिलिप साहू, अनुसूचित जाति गोपाल भूआर्य, अल्पसंख्यक मोर्चा से हैरी जोसेफ ने कार्यकम मे कार्यकर्ताओ को जोड़ने मे सक्रियता दिखाई ।

सांसद संतोष पांडेय ने 1984 के सिख विरोधी दंगों का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को इस मामले में देश से माफी मांगनी चाहिए। संविधान की प्रति लेकर घूमने वाले कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधते हुए उन्होंने सवाल किया कि संविधान को तार-तार किसने किया। श्री पांडेय ने कहा कि पहले ईवीएम पर सवाल उठाए गए जब इनकी दाल नहीं गली तो अब एसआईआर को लेकर झूठ और भ्रम फैलाने का प्रयास हो रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र बचाने और अराजकता हटाने के लिए सड़कों पर उतरकर कांग्रेस को चुनौती देना जरूरी है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से लोकतांत्रिक मूल्यों और जनादेश के सम्मान के मुद्दे पर जनता के बीच जाने का आह्वान किया।

9वीं बार एसआईआर, नैरेटिव में नहीं फंसेगी जनता:- शिवरतन शर्मा

सभा के मुख्य वक्ता शिवरतन शर्मा ने कहा कि

कांग्रेस के झूठ का पर्दाफाश हो कर रहेगा, जनता इनके नैरेटिव के झांसे में नहीं आने वाली है। उन्होंने बताया कि एसआईआर को लेकर कांग्रेस भ्रम फैला रही है, जैसा यह पहली बार हो रहा है। जबकि देश में अब तक 9 बार एसआईआर हो चुका है। चुनाव आयोग का यह अभियान 7 बार कांग्रेस के शासन काल में हुआ है। भाजपा ने कभी इस प्रकिया में सवाल नहीं उठाए दोषारोपण नहीं किया लेकिन कांग्रेस इस विरोध की आड़ में देश मे अराजकता फैलाना चाहती है। प्रशांत भूषण का रिजीम चेंज और नेहा बोरा का बांग्लादेश और नेपाल की तरह सत्ता परिवर्तन का बयान इस बात का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा से लोकतंत्र को कुचलने के काम किया है। आजादी के बाद प्रधानमंत्री के चयन के दौरान 18 में एक वोट मिलने पर नेहरू को प्रधानमंत्री बनाया गया, वोट चोरी इसे कहते हैं। इंदिरा गांधी के रायबरेली से लोकसभा निर्वाचन को 1975 में हाईकोर्ट ने आदर्श आचार संहिता के उल्लघंन के दोषी मानते हुए निरस्त कर दिया था और 6 वर्षों के लिए चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन इस्तीफा देने के बजाए इंदिरा गांधी ने देश में आंतरिक आपातकाल लगा दिया था। लोकतंत्र की हत्या इसे कहते हैं। 

उन्होंने बताया कि कांग्रेस 13 करोड़ नाम बेवजह काटने का झूठा आरोप लगा रही है। जबकि हकीकत यह है कि इन 13 करोड़ नामों में 2 करोड़ 80 लाख नाम मृत मतदाताओं के हैं। 6 करोड़ मतदाता ऐसे हैं जो स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर रहने चले गए हैं। 1 करोड़ मतदाता ऐसे मतदाता हैं, जिनका नाम दो स्थानों पर है। जबकि 3 करोड़ ऐसे लोग है जो मतदाता बने हुए हैं, लेकिन उनका कोई अतापता नहीं चला। अपने बताए पते पर ये लोग मिले नही और चुनाव आयोग की निर्धारित समय सीमा में ये लोग नाम जुड़वाने भी नहीं पहुंचे। श्री शर्मा ने कहा कि इन तीन करोड़ नामों को लेकर कांग्रेस अनर्गल बातें कर रही है, जबकि हमारी नजर में ये तीन करोड़ लोग फर्जी वोटर थे, जो चुनाव में कांग्रेस के लिए बोगस वोट करते थे। इन नामों के वोटर लिस्ट से कटने से कांग्रेस बौखला गई है।



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