राजनांदगांव। प्रदेश में पटवारियों की हड़ताल के चलते राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वहीं धान खरीदी का समय नजदीक आने के बावजूद किसान अपने रकबे में त्रुटि सुधार कराने के लिए भटकने को मजबूर हैं। इसी बीच अर्नब तूफान के प्रभाव से हुई बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। किसानों की इन समस्याओं को लेकर राजनांदगांव जनपद सदस्य मोहनीश धनकर ने भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए प्रभावित किसानों को तत्काल राहत और मुआवजा देने की मांग की है।
प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मोहनीश धनकर ने कहा कि प्रदेश के किसान पहले ही खेती की बढ़ती लागत, खाद-बीज की व्यवस्था और धान खरीदी की तैयारियों को लेकर परेशान हैं। ऐसे में पटवारियों की हड़ताल ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। धान खरीदी का समय नजदीक है, लेकिन किसान रकबा त्रुटि सुधार कराने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि पटवारियों की हड़ताल के बीच किसानों के रकबा सुधार और अन्य जरूरी राजस्व कार्यों को पूरा करने के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
उन्होंने कहा कि एक ओर पटवारी हड़ताल पर हैं, वहीं दूसरी ओर अर्नब तूफान की मार से किसानों की फसलें प्रभावित हुई हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि फसल क्षति का सर्वे कौन करेगा और प्रभावित किसानों को समय पर मुआवजा कैसे मिलेगा? सरकार को तत्काल प्रभावित गांवों में सर्वे दल भेजकर फसलों को हुए नुकसान का आकलन कराना चाहिए।
मोहनीश धनकर ने मांग की कि प्रदेश सरकार पटवारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर हड़ताल समाप्त कराने की पहल करे, ताकि किसानों के जरूरी काम प्रभावित न हों। साथ ही तूफान प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल फसल क्षति का सर्वे कराकर किसानों को उचित मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
उन्होंने भाजपा सरकार से सवाल करते हुए कहा कि पटवारी हड़ताल के कारण धान पंजीयन और रकबा सुधार में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? तूफान से बर्बाद हुई फसलों का सर्वे कब होगा और प्रभावित किसानों को मुआवजा कब मिलेगा? सरकार को इन सवालों का जवाब देना चाहिए। किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज कर सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।