राजनांदगांव : इन दिनों ओवरलोड भारी वाहनों की बढ़ती आवाजाही ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुनाफे के लालच में ट्रक संचालक नियमों को ताक पर रखकर निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक माल भरकर वाहनों को सड़कों पर दौड़ा रहे हैं। 10 चक्का ट्रक की सामान्य लोडिंग क्षमता लगभग 28 टन होती है, लेकिन कई ट्रकों में 30 से 31 टन तक माल लोड किया जा रहा है। इस अतिरिक्त भार के कारण वाहन असंतुलित हो रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। सर्विस रोड, राष्ट्रीय राजमार्गों पर ओवरलोड वाहनों की आवाजाही आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है।
उड़नदस्ता टीम के अधिकारी बने मूकदर्शक
तेज रफ्तार और अधिक वजन के कारण ट्रकों के ब्रेक फेल होने जैसी घटनाएं भी सामने आ रही हैं, जिससे गंभीर सड़क हादसों की आशंका बनी रहती है। कई बार यह वाहन मोड़ और भीड़भाड़ वाले इलाकों में नियंत्रण खो देते हैं, जिससे छोटे वाहनों और पैदल यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाती है। लोगों का कहना है कि परिवहन विभाग की नियमित जांच और सख्त कार्रवाई की कमी के कारण यह समस्या लगातार बढ़ रही है। परिवहन विभाग के अधिकारी कार्रवाई कर रहे हैं और न ही यातायात की टीम।
सड़कों का हाल खस्ता
ओवरलोड वाहनों का असर सिर्फ सड़क सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव सड़क की गुणवत्ता पर भी पड़ रहा है। भारी दबाव के कारण सड़कों की परतें जल्दी खराब हो रही हैं, जगह-जगह गड्ढे बन रहे हैं और सड़कें टूटने लगी हैं। इससे छोटे वाहन चालकों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ता है और वाहन रखरखाव का खर्च भी बढ़ जाता है। लोगों ने मांग की है कि ओवरलोड वाहनों पर सख्त कार्रवाई की जाए और नियमित चेकिंग अभियान चलाया जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो न केवल सड़कें और अधिक खराब होंगी बल्कि सड़क दुर्घटनाओं की संख्या भी तेजी से बढ़ सकती है।