राजनांदगांव: आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति वर्ग के मेधावी विद्यार्थियों के लिए संचालित उत्कर्ष योजना की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को बड़ा झटका लगा है। विभागीय स्तर पर हुई देरी, स्कूल चयन प्रक्रिया में लापरवाही और समय पर परीक्षा आयोजित नहीं किए जाने के कारण शैक्षणिक सत्र 2026-27 को ‘शून्य सत्र‘ घोषित कर दिया गया है। इस निर्णय का सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों के उन हजारों प्रतिभाशाली बच्चों पर पड़ेगा, जो इस योजना के माध्यम से कक्षा छठवीं में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का सपना देख रहे थे।
उत्कर्ष योजना के तहत प्रवेश परीक्षा हर वर्ष समयबद्ध तरीके से आयोजित की जाती है, ताकि चयनित विद्यार्थियों को नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से ही प्रवेश मिल सके। इस बार परीक्षा मार्च माह में आयोजित हो जानी चाहिए थी, लेकिन विभागीय स्तर पर लगातार देरी होती रही। पहले परीक्षा को स्थगित कर 26 जुलाई 2026 की तिथि घोषित की गई। अभिभावक और विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी में जुटे हुए थे, लेकिन अचानक रायपुर स्थित उच्च कार्यालय से आदेश जारी कर पूरी चयन प्रक्रिया ही निरस्त कर दी गई। इसके साथ ही सत्र 2026-27 को शून्य सत्र घोषित कर दिया गया।
अब नहीं होगी कोई चयन परीक्षा
सबसे बड़ी बात यह है कि इस शैक्षणिक सत्र में उत्कर्ष योजना के तहत कोई प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं होगी। विभागीय अधिकारियों ने भी पालकों को स्पष्ट रूप से कहा है कि वे इस वर्ष आवेदन प्रक्रिया या परीक्षा की उम्मीद न रखें, क्योंकि चयन की पूरी प्रक्रिया समाप्त कर दी गई है। इस निर्णय से उन विद्यार्थियों और उनके परिवारों में गहरी निराशा है, जो कई महीनों से परीक्षा की तैयारी कर रहे थे और बेहतर शिक्षा के अवसर की प्रतीक्षा कर रहे थे। उत्कर्ष योजना विशेष रूप से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए संचालित की जाती है। योजना के तहत चयनित बच्चों को उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण, आवासीय सुविधा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाती है। यही वजह है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थी इस परीक्षा में शामिल होते हैं और इसे अपने भविष्य को बेहतर बनाने का महत्वपूर्ण अवसर मानते हैं।
लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे विद्यार्थी
शिक्षाविद डा राजेश सिहं से ने कहा कि यदि परीक्षा समय पर आयोजित की जाती और स्कूल चयन सहित अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं नियत समय पर पूरी कर ली जातीं, तो आज इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। विभागीय लापरवाही का खामियाजा अब सीधे विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। अधिकारियों का मानना है कि चयन प्रक्रिया शुरू करने में इतनी देर हो चुकी थी कि नए शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों का समायोजन संभव नहीं था। इसी कारण पूरे सत्र को शून्य घोषित करने का निर्णय लिया गया। परीक्षा निरस्त होने की खबर सामने आने के बाद अभिभावकों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि विभाग की प्रशासनिक चूक का दंड बच्चों को क्यों भुगतना पड़े। कई अभिभावकों ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई है।
जानिये क्या है उत्कर्ष योजना
उत्कर्ष योजना (पूर्व में जवाहर उत्कर्ष योजना) अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के मेधावी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी योजना है। इसके तहत चयन परीक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को विशेष विद्यालयों में प्रवेश दिया जाता है, जहां उन्हें बेहतर शैक्षणिक संसाधन, आवासीय सुविधा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाता है। इस वर्ष योजना का शून्य सत्र घोषित होने से न केवल विद्यार्थियों के सपनों को झटका लगा है, बल्कि विभागीय कार्यप्रणाली और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस संबंध में जानकारी लेने के लिए आदिम जाति विकास विभाग की सहायक आयुक्त दीक्षा गुप्ता से मोबाइल फोन पर संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने काल रसीव नहीं किया।