रायपुर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने रायपुर के विकास कार्यों को लेकर राज्य सरकार और नगर निगम की महापौर परिषद पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।आकाश तिवारी नेता प्रतिपक्ष नगर पालिक निगम रायपुर ने बताया कि लगभग 50 दिन पूर्व रायपुर की महापौर जी अपनी परिषद, भाजपा के समस्त पार्षदों एवं एल्डरमैनों के साथ प्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं उपमुख्यमंत्री अरुण साव से उनके निवास पर मुलाकात करने गई थीं। मुलाकात का उद्देश्य राजधानी रायपुर के 70 वार्डों में सर्वांगीण विकास, पेयजल, जल-भराव, नाली, पुलिया, सड़क मरम्मत जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए तत्काल फंड की मांग करना था।
घटनाक्रम के मुख्य बिंदु क्रमवार:
1. 10 करोड़ की घोषणा, सिर्फ आश्वासन: मंत्री अरुण साव द्वारा महापौर जी को 10 करोड़ रुपये की स्वीकृति पर सहमति हेतु 70 वार्डों से प्रस्ताव मंगाने के निर्देश दिए गए।
2. प्रस्ताव जमा, पर 50 दिन से अता-पता नहीं: निर्देश के बाद सभी 70 वार्डों के पार्षदों ने अपने-अपने वार्डों के विकास का प्रस्ताव बनाकर जोन कार्यालयों में जमा कर दिया। प्रति वार्ड लगभग 10 लाख रुपये का प्रस्ताव मांगा गया था। आज 50 दिन से अधिक बीत जाने के बाद भी उस प्रस्ताव की प्रशासनिक या आधिकारिक स्वीकृति मिली या नहीं, इसकी कोई जानकारी निगम को नहीं है।
3. 7 करोड़ और 3 करोड़ का खेल: जानकारी के अनुसार 10 करोड़ में से 7 करोड़ रुपये 70 वार्डों में खर्च होने हैं और शेष 3 करोड़ रुपये महापौर परिषद द्वारा कहां खर्च किए जाएंगे, इसका कोई ब्यौरा सार्वजनिक नहीं है।
4. पिछले साल भी झुनझुना:
नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने बताया कि पिछले वर्ष भी महापौर परिषद मंत्री जी से मिली थी। तब प्रत्येक वार्ड में 50-50 लाख रुपये देने की घोषणा हुई थी। प्रस्ताव 50-50 लाख के मांगे गए, लेकिन स्वीकृति मात्र 20 से 30 लाख की हुई, कहीं-कहीं 35 लाख तक। आज तक प्रति वार्ड 10 से 15 लाख रुपये का हिसाब बाकी है।
नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि —
> "क्या रायपुर की ट्रिपल इंजन सरकार सिर्फ कागजों पर प्रस्ताव बनाकर खानापूर्ति कर रही है? राजधानी की जनता गड्ढों वाली सड़कों, जल-भराव, टूटी नालियों, जर्जर पुलियाओं और उखड़ी गलियों से जूझ रही है। बरसात बीत रही है, लेकिन नालियों की सफाई और जल-भराव का निराकरण नहीं हो रहा है। वार्डों में एक भी नया काम शुरू नहीं हो पा रहा है।"
> "नीति यह बन गई है — घोषणा 50 लाख की, प्रस्ताव 50 लाख का, और स्वीकृति 25-30 लाख की, उसमें भी जीएसटी काटकर। यह कैसा ट्रिपल इंजन है जो पैसा देने में भी महीनों लगा देता है?"
नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि सरकार तत्काल 10 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति जारी करे, 70 वार्डों में काम शुरू कराए
अन्यथा कांग्रेस पार्षद दल सड़क पर उतरकर जनता की आवाज उठाएगा।