May 20, 2026


आठ वर्ष बाद भी शुरू नहीं कराई जा सकी दिग्विजय स्टेडियम की लिफ्ट

यह कैसी सुविधा: स्टेडियम कोे संवारने प्रशासन के पास फंड नहीं, बजट घोषणा भी अधूरी

राजनांदगांव : रमन सरकार के तीसरे कार्यकाल के अंतिम दिनों में लोकार्पित दिग्विजय स्टेडियम में लगाई गई लिफ्ट आज तक शुरू नहींं कराई जा सकी है। तब 54 करोड़ रुपये की कार्ययोजना में लगभग डेढ़ करोड़ रुपये इसी लिफ्ट पर खर्च किए गए थे। आठ वर्षों में स्टेडियम में कोई भी बड़ा खेल आयोजन नहीं कराया जा सका है। इस कारण लिफ्ट की आवश्यकता भी नहीं पड़ी। अब स्थिति यह है कि लगी-लगी यह लिफ्ट जाम हो गई है। समय रहते इसका संचालन शुरू नहीं कराया गया तो उसके कलपूर्जों के भी खराब होने की आशंका है।

मुख्य द्वार से लगे क्षेत्र में ही लिफ्ट लगाई गई जो प्रथम व द्वितीय तल तक जाती है। इसका उपयोग किसी बड़े आयोजन के दौरान वीआइपी दर्शक, खिलाड़ी व प्रशासनिक अधिकारियों के लिए किया जाना है। ठेकेदार ने तो लिफ्ट लगा दी, लेकिन स्थानीय प्रशासन इन आठ वर्षों में उसका उपयोग तय नहीं कर सका। परिणामस्वरूप लिफ्ट अब तक शुरू नहींं कराई जा सकी है। इस कारण इसकी मशीनरी जाम हो गई है। उसके सामान भी खराब हो रहे हैं। पिछले सप्ताह रायपुर से पहुंची तकनीकी टीम ने जांच की तो कई सामान खराब निकले। पता चला है कि खराब सामानों को बदलने मुंबई से आर्डर किए गए हैं।

उधर अब तक लगभग 60 करोड़ रुपये की लागत से जीर्णोद्धार वाले दिग्विजय स्टेडियम में अब भी कई आवश्यक काम शेष हैं। मैदान के समतलीकरण के रूप में उसका दुरूस्तीकरण नहीं हो पाने के कारण रणजी उसी स्तर का कोई क्रिकेट आयोजन संभव नहीं है। इसके लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने पहले ही जिला क्रिकेट संघ को मैदान की कमियों को दूर करने का सुझाव दे रखा है। लेकिन प्रशासन के पास उतना फंड है नहीं और शासन से कुछ मिल नहीं रहा। वहां की फ्लट लाइट भी खराब हो चुकी है। शाम के बाद स्टेडियम का अंदरूनी भाग घुप अंधेरे में खो जाता है। इस कारण इस वर्ष छत्तीसगढ़ क्रिकेट प्रीमियर लीग की मेजबानी छीन गई। फ्लड लाइट के अलावा बिजली संबंधी कार्यों के लिए राज्य शासन से साढ़े छह करोड़ रुपये की मांग की गई है। यह बजट में भी शामिल है, लेकिन अब तक फूटी कौड़ी नहीं मिल सकी है।

क्रिकेट प्रेमियों को हाथ लगी घोर निराशा

आइपीएल के बाद दिग्विजय स्टेडियम में संभावित सीसीपीएल की मेजबानी छीन ली गई है। इसके प्रमुख कारणों में खराब मैदान और फ्लड लाइट की कमी है। स्टेडियम समिति मैदान को समय रहते दुरूस्त नहीं करा सकी। साथ ही बजट में प्रविधान के बाद भी उसमें शामिल राशि लगभग साढ़े छह करोड़ रुपये शासन से उपलब्ध नहीं होना है। यही कारण है कि अखिल भारतीय हाकी प्रतियोगिता के बाद राज्य स्तरीय प्रीमियर लीग क्रिकेट का आयोजन भी उदासीनता की भेंट चढ़ गई। छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ ने यहां कोई भी मैच कराने से साफ मना कर दिया है। इससे लंबे बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे क्रिकेट प्रेमियों को घोर निराशा हाथ लगी है।


Related Post

Advertisement

Tranding News

Get In Touch