राजनांदगांव : खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के घुमका नगर पंचायत चुनाव ने अब स्थानीय राजनीति को गर्मा दिया है। यह चुनाव सिर्फ नगर पंचायत के प्रतिनिधियों को चुनने तक सीमित नहीं माना जा रहा बल्कि इसे प्रदेश की ढाई साल पुरानी भाजपा सरकार के कामकाज पर जनता की राय के तौर पर भी देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि घुमका का जनादेश यह तय करेगा कि जनता भाजपा सरकार से संतुष्ट है या फिर नाराजगी का माहौल बन रहा है।
दरअसल खैरागढ़ क्षेत्र की राजनीति पिछले कुछ वर्षों में लगातार बदलाव के दौर से गुजरी है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आम विधानसभा चुनाव के दौरान खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले की घोषणा कर क्षेत्र की जनता को बड़ी सौगात दी थी। इसी घोषणा के बाद क्षेत्र में कांग्रेस के प्रति विश्वास का माहौल मजबूत हुआ। इसका असर खैरागढ़ विधानसभा उपचुनाव में भी देखने को मिला जब कांग्रेस प्रत्याशी यशोदा नीलांबर वर्मा ने भारी मतों से जीत दर्ज की। इस चुनाव की सबसे बड़ी चर्चा भाजपा के लोकप्रिय नेता विक्रांत सिंह की हार रही थी। विक्रांत सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के भांजे होने के साथ-साथ खैरागढ़ भाजपा का बड़ा चेहरा माने जाते रहे हैं। बावजूद इसके जनता ने कांग्रेस के पक्ष में मतदान कर राजनीतिक समीकरण बदल दिए थे। अब घुमका नगर पंचायत चुनाव को भी उसी राजनीतिक कड़ी का अगला पड़ाव माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि घुमका को नगर पंचायत का दर्जा दिलाने का श्रेय भी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को जाता है। यही वजह है कि क्षेत्र में कांग्रेस समर्थकों का उत्साह बढ़ा हुआ है और माना जा रहा है कि जनता एक बार फिर कांग्रेस के पक्ष में झुकाव दिखा सकती है। वहीं भाजपा के लिए यह चुनाव किसी चुनौती से कम नहीं माना जा रहा। प्रदेश में सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार के कामकाज विकास योजनाओं और स्थानीय मुद्दों पर जनता की प्रतिक्रिया इस चुनाव में साफ नजर आ सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि भाजपा यहां मजबूत प्रदर्शन करती है तो इसे सरकार के प्रति जनता के भरोसे के रूप में देखा जाएगा लेकिन परिणाम विपरीत रहे तो यह भाजपा के लिए चिंता का संकेत भी बन सकता है।अब सभी की नजर घुमका नगर पंचायत चुनाव पर टिकी हुई है जहां जनता का फैसला आने वाले समय की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।