राजनांदगांव :- जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष मदन साहू ने राज्य सरकार द्वारा आयोजित किए जा रहे सुशासन शिविरों को केवल दिखावा और राजनीतिक मंच करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन शिविरों में जनता की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा बल्कि सरकार केवल अपनी वाहवाही लूटने में लगी हुई है।
श्री साहू ने कहा कि पिछले सुशासन शिविरों में दिए गए शिकायत और मांग संबंधी आवेदनों का आज तक निराकरण नहीं हुआ है। किसान खाद के लिए दर-दर भटक रहे हैं गांवों में लगातार बिजली कटौती से लोग भीषण गर्मी में परेशान हैं और राजस्व रिकॉर्ड सुधारवाने के लिए किसानों को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंचायतों में निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं जनपद पंचायत के अधिकांश कार्य अधूरे हैं और मनरेगा मजदूर रोजगार के लिए भटक रहे हैं। इसके बावजूद सरकार सुशासन के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है जबकि अधिकारी-कर्मचारी भीषण गर्मी में केवल औपचारिकता निभाने को मजबूर हैं। श्री साहू ने बताया कि वह पिछले शिविर में दिए गए आवेदन की पूरी फाइल लेकर मंच पर पहुंचे थे और वहां मौजूद डिप्टी कलेक्टर तथा डोगर गांव के एसडीएम से सवाल किया कि आखिर एक साल बाद भी आवेदन का निराकरण क्यों नहीं हुआ। उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारी को मंच पर बुलाकर जवाब देने की मांग की लेकिन डिप्टी कलेक्टर ने अधिकारी को बुलाने से साफ इनकार कर दिया।।उन्होंने आरोप लगाया कि मंच पर केवल सत्ताधारी दल के नेताओं को अधिकारियों से सवाल-जवाब करने का अवसर दिया जा रहा था जिससे यह स्पष्ट होता है कि सुशासन शिविर आम जनता की समस्याओं के समाधान के बजाय भाजपा नेताओं की राजनीति का मंच बनकर रह गया है। उन्होंने ने कहा कि डबल इंजन की सरकार पूरी तरह विफल साबित हो रही है। किसानों को समय पर खाद नहीं मिल रही बिजली बिल बढ़े हुए आ रहे हैं और ऊपर से अघोषित बिजली कटौती ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। इसी दौरान क्षेत्र से निर्वाचित जनपद सदस्य सरिता साहू भी अपने आवेदन को लेकर मंच पर पहुंचीं लेकिन उन्हें भी अधिकारियों की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। निराश होकर उन्हें मंच से वापस लौटना पड़ा। मदन साहू ने इसे जनप्रतिनिधियों का अपमान बताते हुए कहा कि क्षेत्र के निर्माण कार्यों की जानकारी तक जनप्रतिनिधियों को उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि केवल दिखावे के लिए सुशासन शिविर लगाने के बजाय जनता और किसानों की वास्तविक समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाए।