October 23, 2026


सरकारी स्कूल बना निजी पार्किंग स्थल अनुमति किसकी

गंजपारा के शासकीय विद्यालय परिसर में तीन दिनों से पार्किंग का मामला, शिक्षा विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल

राजनांदगांव :- बच्चों की शिक्षा के लिए बनाए गए सरकारी स्कूल परिसर का उपयोग यदि निजी व्यावसायिक कार्यक्रमों के लिए पार्किंग स्थल के रूप में किया जाने लगे तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि आखिर इसकी अनुमति किसने दी और किन नियमों के तहत सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल किया जा रहा है शहर के गंजपारा स्थित शासकीय अंग्रेजी माध्यम प्राथमिक विद्यालय क्रमांक-06 (इग्नाइट) परिसर को महावीर ज्वेलर्स के उद्घाटन कार्यक्रम के लिए लगातार तीन दिनों से पार्किंग स्थल के रूप में उपयोग किए जाने का मामला सामने आया है। इस मामले ने सरकारी संपत्ति के उपयोग, शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी और प्रशासनिक अनुमति की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या स्कूल परिसर को निजी कार्यक्रम के लिए पार्किंग स्थल बनाने की विधिवत अनुमति ली गई थी? यदि अनुमति दी गई है, तो किस अधिकारी ने दी और किन शर्तों पर दी गई वहीं यदि इसके लिए किसी प्रकार की आधिकारिक स्वीकृति नहीं ली गई तो सरकारी स्कूल परिसर का उपयोग किसके निर्देश पर किया जा रहा है इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना जरूरी है। सरकारी स्कूल किसी निजी व्यावसायिक प्रतिष्ठान की पार्किंग व्यवस्था का विकल्प नहीं हो सकता। स्कूल परिसर का उपयोग किस उद्देश्य से और किन परिस्थितियों में किया जा सकता है यह संबंधित नियमों एवं सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के अधीन होना चाहिए। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। जानकारी के अनुसार गंजपारा स्थित शासकीय अंग्रेजी माध्यम प्राथमिक विद्यालय क्रमांक-06 (इग्नाइट) परिसर का उपयोग महावीर ज्वेलर्स के उद्घाटन कार्यक्रम के लिए लगातार तीन दिनों से पार्किंग स्थल के रूप में किए जाने का मामला सामने आया है। यदि स्कूल परिसर का इस प्रकार उपयोग किया गया है तो यह जानना आवश्यक है कि इसकी व्यवस्था किसने की और इसके पीछे संबंधित विभाग की क्या भूमिका रही। क्या स्कूल प्रबंधन को इस संबंध में कोई निर्देश मिला था क्या स्थानीय स्तर पर किसी अधिकारी की सहमति ली गई थी क्या जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को इसकी जानकारी थी इन सभी बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है। सरकारी संस्थानों के परिसरों का उपयोग किसी अन्य प्रयोजन के लिए किए जाने की स्थिति में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। खासकर तब, जब मामला बच्चों की शिक्षा के लिए निर्धारित परिसर से जुड़ा हो। इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर स्कूल प्रबंधन तक, संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे स्कूल परिसर के उपयोग से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करें। यदि विभाग की जानकारी में स्कूल परिसर का इस्तेमाल निजी कार्यक्रम के लिए किया गया तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि इसकी अनुमति किस आधार पर दी गई। वहीं यदि विभाग को इसकी जानकारी नहीं थी तो यह भी जांच का विषय है कि स्कूल परिसर में लगातार तीन दिनों तक पार्किंग की व्यवस्था कैसे संचालित होती रही। क्या शिक्षा विभाग इस मामले की जांच कराएगा? क्या संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा और क्या सरकारी स्कूल परिसर के उपयोग को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा? इन सवालों पर विभाग का पक्ष सामने आना जरूरी है। शासकीय विद्यालयों का निर्माण बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जाता है। स्कूल परिसर में उपलब्ध स्थान और सुविधाएं मूल रूप से शैक्षणिक गतिविधियों तथा विद्यालय से संबंधित आवश्यकताओं के लिए होती हैं। ऐसे में किसी निजी व्यावसायिक कार्यक्रम के दौरान परिसर को पार्किंग स्थल के रूप में इस्तेमाल किए जाने की खबर सामने आने पर स्वाभाविक रूप से सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग को लेकर सवाल उठते हैं। हालांकि इस मामले में स्कूल की पढ़ाई, बच्चों की सुरक्षा या शैक्षणिक गतिविधियों पर किसी प्रत्यक्ष प्रभाव की पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए यह भी जांच के दौरान स्पष्ट किया जाना चाहिए कि पार्किंग की व्यवस्था के कारण स्कूल की नियमित गतिविधियों पर कोई असर पड़ा या नहीं और परिसर के उपयोग के दौरान आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था का पालन किया गया या नहीं। मामले को लेकर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से अपेक्षा है कि वे तथ्यों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करें। जांच में यह पता लगाया जाना चाहिए कि स्कूल परिसर का उपयोग किसकी अनुमति से किया गया अनुमति देने वाला अधिकारी सक्षम था या नहीं परिसर के उपयोग के लिए निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं तथा इस व्यवस्था के लिए जिम्मेदार कौन है। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही भविष्य में सरकारी स्कूलों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों के परिसरों का उपयोग निजी आयोजनों के लिए किए जाने की स्थिति में अनुमति एवं जवाबदेही की प्रक्रिया स्पष्ट की जानी चाहिए। गंजपारा के शासकीय अंग्रेजी माध्यम प्राथमिक विद्यालय क्रमांक-06 (इग्नाइट) परिसर को निजी कार्यक्रम के लिए पार्किंग स्थल के रूप में इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आने के बाद अब निगाहें शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। सबसे अहम सवाल यही है कि सरकारी स्कूल परिसर को पार्किंग स्थल बनाने की अनुमति आखिर किसने दी क्या जिला शिक्षा अधिकारी इस मामले में जांच के निर्देश देंगे क्या स्कूल प्रबंधन से जवाब मांगा जाएगा और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो क्या जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग की जांच और आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल, सरकारी स्कूल परिसर के उपयोग को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है ताकि सार्वजनिक संपत्ति का इस्तेमाल निर्धारित नियमों के अनुरूप हो सके।



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