राजनांदगांव: बारिश में जिन स्थानों पर पानी भरने से परेशानी होती है, वहां अब वर्षा जल को भूजल संवर्धन का माध्यम बनाया जाएगा। नगर निगम शहर के सात चिह्नित स्थानों पर इंजेक्शन वेल बनाने जा रहा है। प्रत्येक वेल के निर्माण पर 5.70 लाख रुपये खर्च होने का प्रविधान है। योजना का उद्देश्य वर्षा जल को जमीन के भीतर पहुंचाकर भूजल स्तर बढ़ाना और जलभराव की समस्या कम करने में मदद करना है।
यह काम राज्य शासन की पं. दीनदयाल उपाध्याय भूजल संवर्धन योजना के तहत किया जा रहा है। राज्य शहरी विकास अभिकरण ने जनवरी 2026 में नगर निगमों से प्रस्ताव मांगे थे। इसके बाद स्थलों के चयन और तकनीकी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। नगर निगम सात स्थानों पर इंजेक्शन वेल स्थापित करने की तैयारी में है। इसके लिए सर्वेक्षण कर स्थानों का चयन किया गया है। इनमें नवागांव, ममता नगर, नेहरू नगर, पुराना शीतला तालाब के पास, यातायात पार्किंग स्थल, गौरव पथ और महावीर धान खरीदी केंद्र के पास के स्थल शामिल हैं।
चट्टानों की दरारों की होगी पहचान
इंजेक्शन वेल बनाने से पहले चयनित स्थलों पर भू-भौतिकीय सर्वे किया जाएगा। इसका उद्देश्य जमीन के नीचे चट्टानों की दरारों और पानी के प्रवाह के अनुकूल संरचनाओं की पहचान करना है। इसके आधार पर वेल की जगह और गहराई तय की जाएगी, ताकि वर्षा जल को ऐसी दरारों तक पहुंचाया जा सके जहां से वह जमीन के भीतर रिसकर भूजल भंडार को रिचार्ज कर सके। तकनीकी दस्तावेजों में इसके लिए ‘वी-वायर’ तकनीक का उल्लेख है।
कैसे काम करेगा इंजेक्शन वेल
इस व्यवस्था में वर्षा जल को पहले एकत्र कर गाद और कचरे से अलग करने के लिए फिल्टर व्यवस्था से गुजारा जाएगा। इसके बाद पाइप और विशेष स्क्रीन की मदद से पानी को जमीन के भीतर निर्धारित गहराई तक पहुंचाया जाएगा। इससे पानी सतह पर बहकर व्यर्थ होने के बजाय भूजल पुनर्भरण में मदद कर सकता है। इससे जलभराव कम करने और भूजल उपलब्धता सुधारने में लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसका वास्तविक असर स्थल की भूगर्भीय संरचना, जल की गुणवत्ता और रखरखाव पर निर्भर करेगा।
सेमी क्रिटिकल जोन से बाहर आया विकासखंड
भूजल संरक्षण के प्रयासों के बीच राजनांदगांव के लिए राहत की बात यह है कि वर्ष 2022-23 की केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट में विकासखंड को सेमी क्रिटिकल जोन में रखा गया था। सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, अब यह इस श्रेणी से बाहर आ गया है। उपलब्ध आंकड़ों में भूजल दोहन का स्तर 78 प्रतिशत से घटकर 61 प्रतिशत होने की जानकारी दी गई है। ऐसे में इंजेक्शन वेल जैसे उपाय वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण के प्रयासों को आगे बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं।