प्रशासनिक लापरवाही और ठेकेदार द्वारा डकैती की बलि चढ़ा निर्माण
खरसिया : प्राप्त जानकारी एवं विशेष खोजी रिपोर्ट के अनुसार शासकीय फाइलों में जिसे जनसुविधा और विकास का नाम दिया गया है, वह धरातल पर वह खरसिया की जनता के लिए एक सुनियोजित यातना बन चुका है। वर्षों के खून-पसीने के संघर्ष और अंतहीन इंतज़ार के बाद खरसिया विधानसभा को जिस रेलवे ओवरब्रिज की सौगात मिली थी, उसे ठेकेदार की घोर लापरवाही निर्माण और शासन-प्रशासन की रीढ़हीन कार्यशैली ने खतरे के जाल में जनता जनार्दन की जान को तब्दील कर दिया है। सवाल यह है कि करोड़ों रुपये के इस सरकारी प्रोजेक्ट में आम आदमी का खून-पसीना बह रहा है या भ्रष्टाचार की मलाई खाई जा रही है?
नियम-कायदों की कब्र पर खड़ा होता ओवरब्रिज
इंजीनियरिंग और निर्माण मानकों का बुनियादी नियम कहता है कि निर्माण से पहले जनता के लिए एक सुव्यवस्थित, पक्की सर्विस रोड दी जानी चाहिए। लेकिन खरसिया में ठेकेदार ने प्रशासनिक शह पर नियमों को रद्दी के टोकरे में फेंक दिया है।
लापरवाही का दलदल
बिना सर्विस रोड के शुरू हुए इस काम ने पूरे इलाके को कीचड़ और गड्ढों के नरक में बदल दिया है। प्रशासनिक अंधापन जिस मार्ग से शासन-प्रशासन के नुमाइंदे एसी गाड़ियों में उड़ती धूल और कीचड़ के बीच से गुजरते हैं, क्या उन्हें यह विनाशकारी अव्यवस्था नज़र नहीं आती? या फिर ठेकेदार का कमीशन अधिकारियों की आंखों पर पट्टी बांध चुका है?
मासूमों की जिंदगी से सौदा 4 बड़े स्कूलों पर मंडराया खतरे का साया
इस निर्माण कार्य की संवेदनहीनता का सबसे घिनौना चेहरा तब दिखता है जब स्कूली बच्चे इस मार्ग से गुजरते हैं। सरस्वती शिशु मंदिर, कन्याशाला, लाल बहादुर शास्त्री स्कूल और पीएम श्री आत्मानंद इंग्लिश स्कूल जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के हजारों मासूम बच्चे रोजाना लोहे के बाहर निकले नुकीले सरियों, खुले गड्ढों और दलदल के बीच से गुजरने को मजबूर हैं।
बड़ा सवाल - क्या प्रशासन को किसी मासूम की बलि चढ़ने का इंतजार है?
बैरिकेडिंग के नाम पर लोहे के कातिलाना गार्डर लगाए गए हैं जिनका नुकीला लोहा आए दिन राहगीरों और बच्चों को चोटिल कर रहे हैं।
जीवनरेखा पर ताला अस्पताल, मंडी और व्यापार पूरी तरह ध्वस्त
यह केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि पूरे खरसिया शहर की अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं की कमर तोड़ने की साजिश जान पड़ती है। सब्जी मंडी, पुलिस चौकी, विश्राम गृह, पेट्रोल पंप और मुख्य बाजार को जोड़ने वाली इस मुख्य सड़क पर चलना किसी जंग जीतने जैसा है। एम्बुलेंस में तड़पते मरीजों को अस्पताल पहुंचने में घंटों लग रहे हैं।
त्योहारी सीजन में खरसिया का व्यापार ठप्प होने की आशंका
मुख्य बाजार के व्यापारियों का कारोबार फिलहाल ठप्प हो चुका है, और आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए भी व्यापारी वर्ग व्यापार को लेकर परेशान है लेकिन कर वसूलने वाला तंत्र इस तबाही पर आँखें मूँदे बैठा है।
आगामी त्योहारों में शहर में उपद्रव और अव्यवस्था तय
खरसिया का ऐतिहासिक गणेश पूजन, भव्य नवरात्रि और दशहरा मेला, मीना बाजार पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है। लाखों श्रद्धालुओं का जनसैलाब इस मार्ग पर उमड़ता है। यदि ठेकेदार की इस गुंडागर्दी पर तुरंत नकेल कसकर सर्विस रोड नहीं बनाई गई, तो त्योहारों के दौरान शहर में भीषण भगदड़, दुर्घटनाएं और कानून-व्यवस्था का चरमराना तय है।
जल्दी का ड्रामा या घटिया सामग्री से जेब भरने का खेल
शासकीय कागजों में डेडलाइन से पहले काम खत्म करने की झूठी वाहवाही लूटने के चक्कर में घटिया निर्माण का खुला खेल खेला जा रहा है
जंग लगे सरियों से नींव
पुल के पिलरों में जंग खाए हुए सरिए और घटिया क्वालिटी का सीमेंट-रेती धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है।
सुरक्षा मानकों की डकैती न तो रात में चमकने वाले रेडियम साइन बोर्ड लगाए गए हैं, न ही रोशनी का प्रबंध है। मजदूरों की सुरक्षा उपकरण के नाम पर धेला नहीं खर्च किया जा रहा।
यह विकास नहीं, प्रशासनिक शह पर हो रहा अपराध है!
करोड़ों का बजट, घटिया सामग्री, शून्य सुरक्षा और प्रशासनिक मौन—यह सब इशारा करता है कि खरसिया ओवरब्रिज केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का एक बहुत बड़ी साठगांठ है।
जनता का अल्टीमेटम
खरसिया की जनता अब इस नपुंसक प्रशासनिक व्यवस्था और ठेकेदार की तानाशाही को और सहन नहीं करेगी। जल्द से जल्द युद्धस्तर पर गुणवत्तापूर्ण सर्विस रोड का निर्माण शुरू करवाना सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम घटिया सामग्री की उच्चस्तरीय जांच अति आवश्यक है। आखिर खरसिया की अमन प्रिय भोली जनता कब तक इसे बर्दाश्त करेगी।