May 20, 2026


तेल में उछाल 400 से 500 रुपये तक बढ़ी कीमतें

राजनांदगांव : खाद्य तेल की कीमतों में अचानक आई तेज बढ़ोतरी ने न सिर्फ आम उपभोक्ताओं की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है, बल्कि पूरे थोक और खुदरा बाजार में बेचैनी भी बढ़ा दी है। पिछले कुछ दिनों में सरसों, सोया और रिफाइंड तेल के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं। जहां लगभग 10 दिन पहले तक एक पीपा 2000 से 2100 रुपये में आसानी से उपलब्ध था, वहीं अब यही पीपा 2500 से 2600 रुपये तक पहुंच गया है। महज कुछ दिनों में 400 से 500 रुपये की बढ़ोतरी ने बाजार की स्थिति को अस्थिर कर दिया है और इसका सबसे अधिक असर मध्यम एवं निम्न वर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में लोगों से खाने के तेल का कम उपयोग करने और जरूरत के अनुसार ही खरीदारी करने की अपील की थी। इसके बावजूद बाजार में खाद्य तेल की मांग बढ़ने के साथ-साथ कालाबाजारी की आशंका भी गहराने लगी है। शहर के कई थोक और खुदरा बाजारों में तेल की कीमतों में एकाएक उछाल देखा जा रहा है।

 जमाखोरी की आशंका

बाजार में स्थिति बिगड़ने के साथ ही व्यापारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। कई उपभोक्ताओं और स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ थोक व्यापारी और सप्लायर कृत्रिम कमी पैदा कर रहे हैं, जिससे दामों में लगातार उछाल आ रहा है। आशंका जताई जा रही है कि माल को रोककर रखकर धीरे-धीरे बाजार में उतारा जा रहा है, ताकि ऊंचे दाम पर अधिक मुनाफा कमाया जा सके। इसी वजह से जमाखोरी और कालाबाजारी की स्थिति बनने की बात कही जा रही है।

नियंत्रण नहीं तो बिगड़ सकती है स्थिति

इस बढ़ती महंगाई के बीच आम उपभोक्ताओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि पहले से ही सब्जियों, दालों और अन्य खाद्य सामग्री की कीमतें ऊंची हैं, ऐसे में खाद्य तेल की कीमतों ने रसोई का खर्च संभालना और मुश्किल कर दिया है। उपभोक्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि बाजार में सख्त निगरानी रखी जाए और जमाखोरी करने वाले व्यापारियों पर कार्रवाई की जाए। व्यापारी वर्ग का कहना है कि कीमतों में बढ़ोतरी का कारण आपूर्ति श्रृंखला में असंतुलन और थोक स्तर पर लागत बढ़ना है।


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