राजनांदगांव: शर्म की सारी हदें पार हो गईं! कल दिन में माइनिंग विभाग ने कैमरों के सामने “रेत वापस नदी में” डालने का बेशर्म पाखंड रचा, और रात होते ही रेत के भूखे गिद्धों ने राजनांदगांव को जिंदगी देने वाली जिंदा शिवनाथ नदी का सीना चीरकर उसका कलेजा पूरी तरह निकाल लिया।
यह चोरी नहीं, जनता का खून चूसने का खुला नरक है!
यह लूट नहीं, शिवनाथ नदी की हत्या है!
आज रेत सोने से भी महंगा हो गया है।
माफिया से जब्त की गई रेत को माइनिंग विभाग को अपनी तिजोरी में या बैंक के लॉकर में सुरक्षित रखना चाहिए था। लेकिन प्रशासन ने उस बहुमूल्य रेत को लावारिस हालत में नदी किनारे खुलेआम छोड़ दिया। न कोई सुरक्षा घेरा, न कोई चौकीदार, न कोई निगरानी। जानबूझकर ऐसा किया गया ताकि रात में उनके सगे माफिया आसानी से लूट सके। यह सरकारी लापरवाही नहीं, बल्कि माफिया के साथ सांठगांठ का सबूत है।
ग्राम पंचायत भी अब कटघरे में
ग्राम पंचायत के पदाधिकारी भी इस महालूट में चुप्पी साधे बैठे हैं। क्या उनकी आँखों के सामने सैकड़ों डंपर-जेसीबी रातभर शिवनाथ नदी में लूट मचा रहे थे और वे अनजान बने रहे? या फिर पंचायत भी माफिया के साथ मिली हुई है? गाँव की पंचायत, जो जनता की पहली सुरक्षा होनी चाहिए थी, आज शिवनाथ नदी की हत्या में सहयोगी बन चुकी है।
दिन का ढोंग, रात का लूट का तांडव
ग्रामीणों और पत्रकारों के कैमरे अब खुल्लमखुल्ला सबूत पेश कर रहे हैं। शिवनाथ नदी किनारे सैकड़ों भारी वाहनों के गहरे टायर निशान, पानी से भरे विशाल गड्ढे और रेत के कुएँ चीख-चीखकर गवाही दे रहे हैं कि रात भर कैसा खूनी लूट का खेल चला।
दिन में अधिकारी फोटो खिंचवा कर प्रेस नोट जारी कर रहे थे रहे थे, कि हमने ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया। रात में माफिया लूट रहा था और ग्राम पंचायत चुप्पी साधे बैठी थी। क्या यह सब पूर्व नियोजित साजिश नहीं थी?
अब जवाब दो, वरना गद्दी उखाड़ दी जाएगी!
1. रात के अंधेरे में सैकड़ों डंपर और जेसीबी शिवनाथ नदी पर कैसे पहुँचे? 54 ट्रिप रेत मात्र एक रात में कैसे गायब हो गया? पुलिस-प्रशासन और ग्राम पंचायत सोए हुए थे या माफिया को एस्कॉर्ट दे रहे थे?
2. जिस माइनिंग अधिकारी की नाक के नीचे सालों से यह लूट का नंगा नाच चल रहा है, उसे अभी तक जेल क्यों नहीं भेजा गया? किस मंत्री, किस सर परस्त आका के छत्रछाया में यह सब खेल हो रहा है ?
3. सत्ता पक्ष, विपक्ष के बड़े नेता और ग्राम पंचायत के पदाधिकारी — सब इस शिवनाथ नदी की खुली हत्या पर क्यों चुप हैं? इनकी चुप्पी की क्या कीमत चुकाई जा रही है?
जनता अब आग के अंदर है
ऑक्सीजोन के ये रेत के ढेर नहीं — ये राजनांदगांव को जिंदगी देने वाली शिवनाथ नदी का कलेजा है, हमारे बच्चों का भविष्य, हमारी नदियों का अस्तित्व और आने वाली पीढ़ी का आखिरी पानी है, जिसे माफिया, प्रशासन, और सफेद पोस्ट लोग मिलकर नोंच रहे हैं।
अगर ये सब अभी भी आँखें मूंदे बैठे रहे तो याद रख लें — जनता सब देख रही है । पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसने वाली जनता अब चुप रहने वाली नहीं है।
चेतावनी:
यह सिर्फ खबर नहीं, राजनांदगांव की जनता का उबलता हुआ गुस्सा और आक्रोश है।
सिस्टम अब नहीं जागा तो यह समझ ले, जनता खुद जाग चुकी है और अब हिसाब लेगी!