आरंग। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की मूल विचारधारा, सामाजिक समरसता और सामाजिक न्याय के संदेश को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित रायपुर संभाग स्तरीय प्रशिक्षण शिविर में पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. शिवकुमार डहरिया ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया। उन्होंने ‘सामाजिक समरसता के पुरोधा’ विषय पर कार्यकर्ताओं के समक्ष विस्तार से विचार रखते हुए सामाजिक न्याय, समानता और भाईचारे को मजबूत करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. डहरिया ने “जय जोहार, जय छत्तीसगढ़ और जय कांग्रेस” के नारों के साथ किया। शिविर में रायपुर संभाग के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे ब्लॉक अध्यक्ष, मास्टर ट्रेनर्स, पार्टी पदाधिकारी एवं प्रशिक्षक शामिल हुए।
सामाजिक समरसता का अर्थ समान सम्मान और अधिकार
डॉ. डहरिया ने कहा कि सामाजिक समरसता का अर्थ केवल एक साथ बैठना या मिल-जुलकर रहना नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग, जाति, धर्म और तबके को समान सम्मान, अधिकार और अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लंबे राजनीतिक इतिहास में सामाजिक समरसता और सामाजिक न्याय उसके प्रमुख विचारों में रहे हैं।
उन्होंने महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, सरदार वल्लभभाई पटेल, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि इन नेताओं ने अपने-अपने समय में सामाजिक समानता, लोकतांत्रिक मूल्यों और वंचित वर्गों की भागीदारी को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए।
महापुरुषों के योगदान को किया याद
डॉ. डहरिया ने कहा कि महात्मा गांधी ने छुआछूत के खिलाफ आवाज उठाते हुए समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया। पंडित नेहरू ने धर्मनिरपेक्षता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को महत्व दिया। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने सामाजिक भेदभाव के खिलाफ संघर्ष करते हुए संविधान के माध्यम से प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार प्रदान करने की मजबूत व्यवस्था दी।
उन्होंने सरदार पटेल द्वारा रियासतों के एकीकरण, इंदिरा गांधी के गरीबी उन्मूलन के प्रयासों तथा राजीव गांधी द्वारा पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया।
छत्तीसगढ़ की समरसता की परंपरा को किया रेखांकित
छत्तीसगढ़ के सामाजिक इतिहास का उल्लेख करते हुए डॉ. डहरिया ने परम पूज्य गुरु घासीदास जी के “मनखे-मनखे एक समान” के संदेश को सामाजिक समानता की महत्वपूर्ण मिसाल बताया। उन्होंने शहीद वीर नारायण सिंह के बलिदान और पंडित सुंदरलाल शर्मा के सामाजिक सुधारों एवं आंदोलनों का भी स्मरण किया।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी में सामाजिक समरसता और भाईचारे की गहरी परंपरा रही है। इन महापुरुषों के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
हर बूथ तक पहुंचाने का दिलाया संकल्प
वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए डॉ. डहरिया ने कहा कि सामाजिक ताने-बाने को मजबूत बनाए रखने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को समाज के प्रत्येक वर्ग के बीच जाकर संवाद करना होगा। उन्होंने कहा कि ब्लॉक अध्यक्षों और मास्टर ट्रेनर्स की जिम्मेदारी केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें पार्टी की विचारधारा और सामाजिक न्याय के संदेश को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का दायित्व भी निभाना है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान करते हुए कहा कि जब मास्टर ट्रेनर्स और ब्लॉक अध्यक्ष अपने-अपने क्षेत्रों में जाएं तो सामाजिक समरसता, समानता और सामाजिक न्याय के विचार को हर घर, हर गली और हर बूथ तक पहुंचाने का संकल्प लेकर जाएं।
डॉ. डहरिया ने अपने संबोधन का समापन सामाजिक एकता का संदेश देते हुए कहा—
“जात-पात का भेद मिटाएं, सबको गले लगाएं, कांग्रेस की इस विचारधारा से एक नया और सशक्त छत्तीसगढ़ बनाएं।”
प्रशिक्षण शिविर में वरिष्ठ कांग्रेस पदाधिकारी, विषय विशेषज्ञ प्रशिक्षक, रायपुर संभाग के विभिन्न जिलों से पहुंचे ब्लॉक अध्यक्ष एवं बड़ी संख्या में मास्टर ट्रेनर्स उपस्थित रहे।