राजनांदगांव: डाग बाइट के बढ़ते मामलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। शहर में हर वर्ष करीब 3200 से 3300 लोग घुमंतू कुत्तों के हमले का शिकार हो रहे हैं। बावजूद इसके कुत्तों के बधियाकरण अभियान पर ब्रेक लगा हुआ है, जिससे उनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इधर, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद नई चुनौतियां सामने आ गई हैं। कोर्ट ने कहा है कि रेबीज संक्रमित और गंभीर रूप से बीमार कुत्तों को मारने के विकल्प पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। हालांकि नगर निगम और पशु चिकित्सा विभाग के पास शहर के घुमंतू कुत्तों का कोई सटीक रिकार्ड नहीं है। बीमार कुत्तों के इलाज और नियंत्रण के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से समस्या और गंभीर होती जा रही है। रिकार्ड की कमी और नसबंदी अभियान बंद होने के कारण प्रशासन के सामने घुमंतू कुत्तों पर नियंत्रण बड़ी चुनौती बन गया है।
नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि शेल्टर होम के लिए अभी प्रतीक्षा करना होगा। बड़े शहरों में ही शेल्टर होम है। बता दें कि जिला पशु चिकित्सालय में हर वर्ष 2100 पालतू कुत्तों का एंटी रैबीज लगाया जा रहा है। एंटी रैबीज लगाने के लिए पशु पालकों से 10 रुपये पंजीयन शुल्क और 50 रुपये एंटी रैबीज का लिया जा रहा है। पालतू कुत्तों को नियमित एंटी रैबीज लगने के बाद भी लोगों में दहशत बनी हुई है। क्योंकि इंटरनेट मीडिया में रैबीज प्रभावित मरीजों की वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। जिसके बाद लोगों में दहशत है।
फीडिंग पाइंट का प्रतीक्षा
नगर निगम क्षेत्र के गली-मोहल्लों से लेकर मुख्य सड़कों तक कुत्तों के झुंड दिखाई देना अब आम बात हो गई है। आए दिन बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों पर हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे लोगों में भय का माहौल है। इसके बावजूद नगर निगम की योजनाएं जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू होती नजर नहीं आ रहीं। नगर निगम द्वारा घुमंतू कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए हर वार्ड में एक फीडिंग पाइंट बनाने की कार्ययोजना तैयार की गई थी। उद्देश्य यह था कि तय स्थानों पर कुत्तों को भोजन उपलब्ध कराया जाए, जिससे वे इधर-उधर भटककर लोगों पर हमला न करें। लेकिन यह योजना कागजों से बाहर नहीं निकल सकी। शहर में अब तक एक भी व्यवस्थित फीडिंग पाइंट तैयार नहीं किया जा सका है, जिससे निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
पशु चिकित्सक ने दिए सुझाव
जिला पशु चिकित्सालय के पशु चिकित्सक विशेषज्ञ डा.तरुण रामटेके ने बताया कि गर्मी में कुत्तों के शरीर में पानी की कमी और चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है। तेज धूप और लू के कारण वे आक्रामक हो जाते हैं। भूख-प्यास से परेशान कुत्ते छोटी सी छेड़छाड़ पर भी काट लेते हैं। साथ ही गर्मी में रेबीज वायरस भी ज्यादा सक्रिय रहता है। सुबह-शाम टहलने निकले लोग और स्कूल जाने वाले बच्चे सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं। खाली प्लाट, कचरा घर और सुनसान गलियों में खतरा ज्यादा है। कुत्ता काट ले तो धोएं, घाव को बहते साफ पानी और साबुन से 10-15 मिनट तक धोएं, एंटीसेप्टिक लगाकर खुला छोड़ दें, पट्टी न बांधें, 24 घंटे के अंदर नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर एंटी-रेबीज वैक्सीन जरूर लगवाएं, जिस कुत्ते ने काटा है, 10 दिन तक उस पर नजर रखें।