राजनांदगांव :- शहरवासियों को सैर-सपाटे के साथ सेहत सुधारने की सुविधा देने के उद्देश्य से दिग्विजय कालेज के पीछे बनाए गए त्रिवेणी उद्यान अब बदहाली का शिकार है। करीब पांच लाख रुपये खर्च कर लगाए गए जिम उपकरणों में से अधिकांश सामान गायब हो चुका है। झूले और बच्चों के मनोरंजन के संसाधन भी टूट चुके हैं। रखरखाव और निगरानी के अभाव में उद्यान की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। हालत यह है कि जहां कभी शहरवासी व्यायाम और मनोरंजन के लिए पहुंचते थे, वहां अब मवेशियों का जमावड़ा नजर आता है। उद्यान निर्माण के साथ करीब पांच लाख रुपये की लागत से विभिन्न जिम उपकरण लगाए गए थे। इनमें हैंड एक्सरसाइज मशीन, रनवे मशीन समेत बच्चों के लिए झूले और पिसल पट्टी शामिल थी। लेकिन वर्तमान में इनमें से अधिकांश उपकरण गायब हैं। जो संसाधन बचे हैं, वे भी रखरखाव के अभाव में खराब हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय-समय पर निगरानी और मरम्मत होती तो उद्यान की यह स्थिति नहीं बनती।
चौपाटी की तर्ज पर बनाई दुकानें, शटर भी नहीं बचे
त्रिवेणी परिसर को लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाने के उद्देश्य से आसपास चौपाटी की तर्ज पर दस से अधिक दुकानें भी बनाई गई थीं। इन दुकानों की नीलामी नहीं होने से लंबे समय से इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। अब स्थिति यह है कि कई दुकानों के शटर तक चोरी हो चुके हैं। परिसर में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहने की शिकायत भी सामने आ रही है। इससे शाम के समय यहां आने वाले लोगों की संख्या भी घट गई है। त्रिवेणी उद्यान की बदहाली अकेली समस्या नहीं है। शहर के कई अन्य उद्यान भी नियमित रखरखाव के अभाव में जर्जर होते जा रहे हैं। कहीं झूले टूटे हैं तो कहीं व्यायाम के उपकरण खराब पड़े हैं। नागरिकों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च कर सुविधाएं विकसित करने के बाद उनके रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जाता। इससे सरकारी राशि से तैयार की गई सुविधाएं कुछ ही वर्षों में अनुपयोगी हो जाती हैं।
बूढ़ा सागर की रेलिंग भी हुई गायब
त्रिवेणी परिसर के साथ बूढ़ा सागर क्षेत्र में भी रखरखाव की स्थिति सवालों के घेरे में है। करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से कराए गए सुंदरीकरण कार्य के तहत झील के चारों ओर बाउंड्रीवाल और रेलिंग लगाई गई थी। वर्तमान में कई हिस्सों से रेलिंग गायब हो चुकी है और अन्य संसाधन भी जर्जर नजर आ रहे हैं। इससे सुंदरीकरण पर खर्च की गई बड़ी राशि के बाद भी व्यवस्था की स्थायित्व पर सवाल उठ रहे हैं।