राजनांदगांव : शहर को निगरानी कैमरों की मजबूत व्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई त्रिनेत्र योजना अब गंभीर अव्यवस्था और लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। लगभग दो वर्ष पूर्व शुरू हुई इस योजना के तहत शहर में सुरक्षा कैमरे लगाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन आज स्थिति यह है कि लगाए गए अधिकांश कैमरे या तो बंद पड़े हैं या पूरी तरह से निष्क्रिय हो चुके हैं। शहर में लगभग 150 से 160 कैमरे लगाए गए थे, जिनमें से 100 से अधिक कैमरे वर्तमान में कार्य नहीं कर रहे हैं। योजना के संचालन के लिए बनाई गई समिति में कुछ समाजसेवियों को शामिल किया गया था, जिनके नेतृत्व में कार्य कराया गया। महावीर चौक में लगे सीसीटीवी का केबल अलग हो गया है। जिला न्यायालय के सामने फ्लाईओवर में लगे सीसीटीवी कैमरे को पेंट से रंग दिया गया है
करोड़ों रुपये की वसूली
विभिन्न सामाजिक संस्थाओं, निजी अस्पतालों, बड़े व्यापारियों और उद्योगपतियों से इस योजना के नाम पर करोड़ों रुपये की वसूली की गई, लेकिन उसके अनुपात में न तो गुणवत्तापूर्ण उपकरण लगाए गए और न ही नियमित रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। कई स्थानों पर लगाए गए कैमरे निम्न गुणवत्ता वाले उपकरणों के कारण खराब हो चुके हैं। साथ ही कैमरों के लिए लगाए गए कई लोहे के पोल जर्जर स्थिति में पहुंच गए हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका भी बनी हुई है। कुछ स्थानों पर पोल झुक गए हैं या अस्थिर अवस्था में लटकते दिखाई दे रहे हैं।
कमेटी गठन के साथ ही विवाद
पुलिस कंट्रोल रूम में जो एक साथ बड़ी टीवी लगना था, नार्मल टीवी लगाकर उसका भी मैनेजमेंट खराब दिया गया है। बताया गया है कि त्रिनेत्र योजना के लिए शहर में पुलिस एवं जिला प्रशासन के देख-रेख में एक कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी को लेकर शुरू दिन से ही इसलिए विवाद सामने आया था। क्योंकि एक संस्था से जुड़े अधिकांश लोग ही कमेटी में सदस्य बनाए गए थे। अब शहर की सबसे बड़ा काम कैमरा लगाने का जब हाशिए पर चला गया
शहर की सबसे बड़ी योजना खटाई में
तीसरी निगाह में रखने के लिए प्रशासिनक सहयोग से बनाई गई सबसे बड़ी योजना खटाई में आ गई है। अब तो त्रिनेत्र योजना को लेकर न कोई बैठक हो रही है और न ही कोई यह पूछने तैयार है कि किसके कारण इस योजना का इस कदर हाल-बेहाल हुआ है। दो साल हो गए हैं योजना को शुरू हुए, लेकिन इस दुर्गती के लिए कोई जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं है। शहर में जिस हिसाब से जन सहयोग को माध्यम बनाकर राशि एकत्रित की गई है, उसको देखते हुए जिम्मेदारी तो तय होना ही चाहिए।