रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी में अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के कर्मचारी अधिकारियों के मौलिक और संवैधानिक अधिकारों का निरंतर उल्लंघन किया जा रहा है। माननीय सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेशों का उल्लंघन एवं माननीय हाई कोर्ट के विभिन्न आदेशों का गलत व्याख्या कर मनमाफिक पदोन्नति आदेश जारी किया जा रहा है। छ.ग. शासन के किसी भी विभाग में इस तरह की कार्यवाही नहीं हो रही है जबकि छत्तीसगढ़ लोक सेवा पदोन्नति नियम 2003 के तहत पुरे राज्य शासन में पदोन्नति प्रकिया संपन्न की जाती है। यह ध्यान देने योग्य है कि विद्युत कंपनी जो कि उर्जा विभाग, छ.ग. शासन के अधीन है और माननीय मुख्यमंत्री जी प्रभारी मंत्री होने के बाद भी उनके विभाग में असंवैधानिक कार्यवाही वाही खुलेआम किया जा रहा है। जिससे छत्तीसगढ़ के जनता के समक्ष छ.ग.शासन की छवि धूमिल हो रही है। विद्युत कंपनी द्वारा स्वयं का नियम-कानून बनाकर पदोन्नति की कार्यवाही की जा रही है। इससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी, राज्य शासन की कपनी की तरह नहीं बल्कि प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह प्रशासन चलाया जा रहा है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल आरक्षित वर्ग अधिकारी कर्मचारी संघ के विभिन्न लबित समस्याओं का भी निराकरण नहीं किया जा रहा है, जिससे राज्य भर के अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लगभग 45 प्रतिशत लोगों में जन आक्रोश व्याप्त है। विदित हो कि पिछले वर्ष भी सामूहिक हड़ताल पर जाना पड़ा था लेकिन आश्वासन के बाद भी विद्युत कंपनी प्रबंधन द्वारा कोई भी सकारात्मक कार्यवाही नहीं की गई। संघ द्वारा इसके विरोध में 13 अप्रैल 2026 से 17 अप्रैल 2026 तक सभी क्षेत्रीय कार्यालय में विरोध प्रदर्शन के साथ सामूहिक इस्तीफा का ज्ञापन सौंपा जायेगा। 20 अप्रैल 2026 को एक दिवसीय सामूहिक अवकाश लिया जायेगा। 27 अप्रैल 2026 से अनिश्चितकालीन अवकाश में जाने का निर्णय लिया गया है। विद्युत कंपनी प्रबंधन की तानाशाही कार्यवाही एवं छ.ग. शासन के मौन समर्थन के विरोध में संघ द्वारा सर्वसम्मति से सामूहिक हड़ताल को सफल बनाने हेतु विद्युत कंपनी के अनुसूचित जाति एवं जनजाति के कर्मचारी अधिकारियों के साथ अन्य आनुसंगिक संगठनों से भी सहयोग की अपील की गई। सामूहिक हड़ताल के दौरान गर्मी के मौसम में विद्युत जैसा अतिआवश्यक सेवा बाधित होने पर विद्युत कंपनी प्रबंधन स्वयं जवाबदेह रहेगा।