April 18, 2026


अभिभावकों पर निर्धारित दुकानों से किताबें ड्रेस खरीदने बना रहे दबाव

मनमानी: निजी स्कूलों में कापी-किताबों में चल रहा है कमीशन का खेल

राजनांदगांव : नये शिक्षा सत्र शुरू होते ही निजी स्कूलों के प्रबंधकों की मनमानी शुरू हो गई है। शहर में 20 से अधिक बड़े स्कूल हैं, जहां सीजीबीएसई, सीजी बोर्ड माध्यम में पढ़ाई हो रही है। निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर निर्धारित दुकानों से ही किताबें और स्कूल ड्रेस खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा विशेष दुकानों के नाम सुझाकर वहीं से महंगी दरों पर किताबें और यूनिफार्म खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। कई मामलों में अन्य दुकानों से सामग्री लेने पर स्वीकार नहीं किया जा रहा, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। यहीं नहीं किसी भी कक्षा की सिंगल किताब भी नहीं दी जा रही है। अभिभावकों को पूरा सेट खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है।

 अभिभावकों की जेब कटनी शुरू हो गई है। कापी-किताबों में कमीशन के नाम पर बड़ा खेल खेला जा रहा है। जिसका शिकार अभिभावक हो रहे हैं। स्कूल प्रबंधनों ने दुकानें भी निर्धारित कर रखी हैं। निर्धारित दुकानों में ही किताबें मिल रही हैं। किताबों में प्रकाशक का नाम है और न ही एमआरपी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कमीशन के चक्कर में निजी प्रकाशक को लाभ पहुंचाने स्कूल प्रबंधन किस हद तक जा सकते हैं। विभागीय कार्रवाई नहीं होने से स्कूल प्रबंधनों के साथ-साथ बुक डिपो संचालकों के हौसले बुलंद हैं। स्कूल प्रबंधन-और बुक डिपों संचालक अभिभावकों को हंसते-हंसते चूना लगा रहे हैं। निजी स्कूलों के प्रबंधन एनसीईआरटी की किताबों की जगह अभिभावकों पर निजी प्रकाशकों की किताबों को खरीदने का दबाव बना रहे हैं। मोटा मुनाफा कमाने के लिए स्कूल से ही कापी किताबें बेच रहे हैं। जो स्कूल किताबें नहीं बेच रहे हैं, उन्होंने अपनी दुकानें निर्धारित भी कर दी हैं। उसी दुकान पर ही उस स्कूल का पाठ्यक्रम मिलेगा। स्कूल की कापी-किताब से लेकर यूनिफार्म, टाई, बेल्ट तक मोटा कमीशन स्कूल प्रबंधन ले रहे हैं।

स्कूलों में कई तरह की ड्रेसें

अभिभावकों हर वर्ष निजी स्कूलों में मोटी शुल्क देते हैं। इसके बावजूद कापी-किताबों में कमीशन के नाम पर अभिभावकों को लूटा जा रहा है। स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को जबर्दस्ती निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने मजबूर कर रहे हैं। इसके चलते अभिभावकों की परेशानी बढ़ गई है।अभिभावकों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह होती है अगर उन्होंने पूरा पाठ्यक्रम एक बार में नहीं खरीदा तो कुछ समय बाद किताबें बाजार में नहीं मिल पाती हैं। इसी तरह स्कूलों में ड्रेसें भी कई तरह की हैं। स्कूल की रोज की ड्रेस, हाऊस ड्रेस, खेल की ड्रेस आदि अलग-अलग लेनी पड़ रही हैं। ड्रेस भी शहर की निर्धारित दुकान पर मिल रहा।


Advertisement

Tranding News

Get In Touch