राजनांदगांव :- वर्तमान समय में बढ़ते साइबर अपराधों में म्यूल बैंक खातों के उपयोग को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव अंकिता शर्मा (भा0पु0से0)* के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री *कीर्तन राठौर रा0पु0से0* एवं नगर पुलिस अधीक्षक श्री *सत्यप्रकाश तिवारी रा0पु0से0* के मार्गदर्शन तथा थाना प्रभारी सिटी कोतवाली निरीक्षक *उपेन्द्र कुमार शाह,* निरीक्षक *विनय पम्मार* प्रभारी सायबर सेल राजनांदगांव द्वारा टीम गठित कर आरोपियों की तलाश एवं गिरफ्तारी हेतु विशेष अभियान चलाया गया।
प्रकरण का विवरण
भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के समन्वय पोर्टल से प्राप्त जानकारी के आधार पर ऐसे म्यूल बैंक खातों की पहचान की गई, जिनका उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि के लेन.देन, व्ययन एवं संवर्धन के लिए किया जा रहा था।
जांच के दौरान यह पाया गया कि संबंधित बैंक खातों का उपयोग साइबर धोखाधड़ी से अर्जित अवैध धनराशि को प्राप्त करने एवं आगे हस्तांतरित करने के लिए किया गया। बैंक खाता धारकों एवं सहयोगियों द्वारा यह जानते हुए भी कि उक्त राशि धोखाधड़ी एवं बेईमानी से प्राप्त की गई है, उसे प्राप्त एवं उपयोग किया जा रहा था। उक्त तथ्यों के आधार पर आरोपियों के विरूद्व थाना सिटी कोतवाली राजनांदगांव में अपराध क्रमांक 556/26 धारा 317 (4), 317(5), 3 (5) भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना के दौरान दिनांक 17.09.2026 को आरोपी राकेश कुमार सिन्हा निवासी वार्ड नं. 13 एकता सदन के पास गौरी नगर ओ0पी0 चिखली जिला राजनांदगांव एवं बालचंद भुआर्य निवासी नवागांव थाना मानपुर जिला मोहला मानपुर अं0़चौकी (छ0ग0) की तलाश कर पूछताछ करने पर जुर्म स्वीकार करने पर दोनों आरोपियों मामलें में विधिवत गिरफ्तार कर आज दिनांक 18.09.2026 को माननीय न्यायालय में प्रस्तुत कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया।
आरोपी राकेश सिन्हा को पूर्व में थाना कोतवाली राजनांदगांव द्वारा अप0क्र0 897/22 धारा 294, 506, 34 भादवि0, एवं अप0क्र0 500/23 धारा 294, 323, 506 भादवि0 के प्रकरण में गिरफ्तार कर चालान किया गया है।
सराहनीय भूमिका
उपरोक्त कार्यवाही में थाना प्रभारी निरीक्षक उपेन्द्र कुमार शाह, निरीक्षक विनय पम्मार प्रभारी सायबर सेल राजनांदगांव, उप निरीक्षक राधेश्याम जूर्री, प्र0आर0 जी0 सिरिल कुमार एवं सायबर सेल राजनांदगांव से प्रधान आर. अखिल अंबादे, आर. विकास केसरवानी, सेहल साहू, खिलेश पटेल, शत्रुहन की सराहनीय भूमिका रही।
क्या है म्यूल अकाउंट
म्यूल अकाउंट ऐसा बैंक खाता होता है जिसका उपयोग साइबर अपराधी अवैध रूप से प्राप्त धनराशि को छिपाने स्थानांतरित करने अथवा निकालने के लिए करते हैं।
म्यूल अकाउंट कैसे काम करता है
अपराधी किसी व्यक्ति को लालच देकर या धोखे से उसका बैंक खाता उपयोग करने की अनुमति प्राप्त करते हैं। साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि उस खाते में जमा की जाती है, इसके बाद राशि को कई अन्य खातों में ट्रांसफर किया जाता है ताकि जांच एजेंसियों के लिए धन का स्त्रोत पता लगाना कठिन हो जाए।
म्यूल अकाउंट धारक कौन हो सकते हैं
ऐसे व्यक्ति जिन्हें यह जानकारी नहीं होती कि उनके खाते का गलत उपयोग किया जा रहा है।
आर्थिक रूप से कमजोर लोग जिन्हें कमीशन या लालच देकर फंसाया जाता है।
ऐसे व्यक्ति जो जानबूझकर अपराधियों की सहायता करते हैं।
इससे बचने के उपाय-
1. किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाताए एटीएम कार्डए चेकबुक या मोबाइल सिम न दें।
2. किसी भी प्रकार के कमीशन या बड़ी रकम के लालच में न आएं।
3. अपने बैंक खाते के लेन.देन की नियमित जांच करें।
4. किसी भी संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तत्काल पुलिस या साइबर सेल को दें।
राजनांदगांव पुलिस की अपील-
राजनांदगांव पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि किसी के कहने पर अपना बैंक खाताएं मोबाईल सिम, चेकबुक अथवा एटीएम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग हेतु न दें। साइबर अपराधी ऐसे खातों का उपयोग गेमिंग एप, गैंबलिंग एप, फर्जी ट्रेडिंग एप, सेक्सटर्शन, डिजिटल अरेस्ट एवं अन्य प्रकार की साइबर ठगी में करते हैं।
खाता किराये पर देना, कमीशन पर उपलब्ध कराना अथवा बेचना कानूनन अपराध है। ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। इन खातों के माध्यम से साइबर अपराध में सहयोग करने वाले खाता, धारकों तथा ऐसे खातों की व्यवस्था करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध भी सख्त कानूनी कार्यवाही की जाएगी।