April 24, 2026


बिना नाली के बन रही 90 करोड़ की सड़क

कलेक्टर को ज्ञापन के बाद भी व्यवस्था नहीं बनाने से ग्रामीणों में आक्रोश

राजनांदगांव: चिखली से खैरागढ़ तक निर्माणाधीन सड़क की लागत भले ही 90 करोड़ रुपये है, लेकिन उसमें नाली शामिल ही नहींं है। शुरुआत से ही गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायत के बीच जब इसकी जानकारी ग्रामीणों को लगी, तो नाराजगी बढ़ने लगी है। सड़क चौड़ीकरण वाले क्षेत्र तिलई, पदुमतरा, खपरी, चवेली और बोरी समेत अन्य ग्रामों के जनप्रतिनिधियों ने दो महीने पहले ही जिलाधीश को ज्ञापन सौंपकर इस समस्या की ओर ध्यान दिलाया था। इसके बावजूद नाली निर्माण का कोई प्रविधान सड़क परियोजना में शामिल नहीं किया गया है। नाली न होने से वर्षा के मौसम में जलभराव, गंदगी और आवागमन में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बिना नाली के सड़क निर्माण अधूरा और अव्यवहारिक होगा। ग्रामीण चाहते हैं कि सभी ग्रामों में नाली निर्माण की स्वीकृति दी जाए और इसे परियोजना का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए।

निर्माणाधीन सड़क परियोजना में बसाहट वाले ग्रामों के भीतर नाली निर्माण नहीं किए जाने को लेकर पूर्व क्षेत्रीय जनपद सभापति ओमप्रकाश साहू ने पहले ही आपत्ति जताई थी। तिलई, पदुमतरा, खपरी, चवेली और बोरी समेत अन्य ग्रामों के जनप्रतिनिधियों ने लगभग तीन महीने पहले ही कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर इस समस्या की ओर ध्यान दिलाया था। इसके बावजूद नाली निर्माण का कोई प्रावधान सड़क परियोजना में नहीं किया गया है।

उधर सड़क में डामरीकरण शुरू कराया जा चुका है, लेकिन बेस के लिए मुरुम की जगह मिट्टी का इस्तेमाल किया जा रहा है। जबकि टेंडर शर्तों में मजबूत बेस के लिए मुरुम का उपयोग किया जाना है। इस कारण सड़क की नींव ही कमजोर होने लगी है। वहीं अनुबंध के मुताबिक जीएसबी-डब्लूएमएम का कार्य किया जाना है, उसमें भी मनमानी की जा रही है। टेंडर शर्तों के मुताबिक अलग – अलग परतों को मिलाकर कुल 60 सेंटीमीटर से अधिक मोटी परत तैयार किया जाना है। जिसमें 200 एमएम जीएसबी का कार्य है। इसके अलावा डब्लूएमएम की 250 एमएम परत बिछाई जानी है। जिसमें गिट्टी और डस्ट को मिक्स कर सतह मजबूत की जाती है। लेकिन इस मापदंड की अनदेखी हो रही है। जिसका असर डामरीकरण के बाद सड़क की क्वालिटी पर होगा। दूसरी तरफ जीएसबी और डब्लूएमएम के दौरान बाईंडिंग की तराई में भी लापरवाही बरती जा रही है। इससे बाइडिंग कमजोर पड़ने की आशंका है। लोक निर्माण विभाग के प्रभारी एसडीओ फारूकी अहमद ने बताया कि अभी वे उच्चाधिकारियों के साथ फील्ड पर निकले हैं। बाद में ही इस बारे में कुछ बता पाएंगे।

 अंदरूनी मार्गों पर सख्ती, मुख्य सड़क पर सुस्ती

जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में अंदरूनी मार्गों का भी जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत कई सड़कें बनाई जा रही है। वहां बसाहट वाले क्षेत्रों में नाली निर्माण को लेकर प्रशासन सख्त है। स्वयं कलेक्टर जितेंद्र यादव ने पिछले दिनों अपने दौरे के समय इसे लेकर विभागीय अधिकारियों के साथ ठेकेदारों को भी चेताया थ, लेकिन प्रतिदिन 25 हजार से अधिक वाहनों की आवाजाही वाले खैरागढ़ मार्ग को लेकर प्रशासन की सुस्ती समझ से परे है। उन्होंने सड़क निर्माण में गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन करने तथा निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के भी निर्देश दिए थे। सोल्डर को गुणवत्ता के साथ मजबूत बनाने कहा था। साथ ही आवश्यक स्थानों पर स्पष्ट साइनेज बोर्ड लगाने करने के निर्देशित किया था। खैरागढ़ मार्ग निर्माण में यह सब किया ही नहीं जा रहा।



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