April 10, 2026


एडवोकेट मौलेश तिवारी की दमदार पैरवी रंग लाई: दुष्कर्म मामले में दमेश्वर निषाद 3 महीने में बरी

राजनांदगांव :- बहुचर्चित दुष्कर्म मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी दमेश्वर निषाद को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। यह निर्णय प्रधान सत्र न्यायाधीश एवं विशेष सत्र न्यायाधीश विजय कुमार होता की अदालत में 9 अप्रैल 2026 को सुनाया गया।

मामले के अनुसार, आरोपी पर आरोप था कि उसने पीड़िता को कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित सिद्धार्थ पैलेस लॉज ले जाकर दो दिनों तक शारीरिक संबंध बनाए। इस आधार पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 376(2) सहित एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।

प्रकरण में पुलिस ने 6 जनवरी 2026 को आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। 20 जनवरी को चालान प्रस्तुत किया गया और 31 जनवरी को आरोप तय हुए। 25 फरवरी को पीड़िता का बयान दर्ज किया गया। सुनवाई के दौरान आरोपी जमानत पर था।

मामले की संयुक्त विवेचना पुलिस अधिकारियों द्वारा की गई, जिसमें 19 अभियोजन साक्षियों को पेश किया गया। गवाहों के परीक्षण और साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद न्यायालय ने पाया कि आरोप संदेह से परे सिद्ध नहीं हो सके, जिसके चलते आरोपी को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया गया।

अभियुक्त की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मौलेश तिवारी ने प्रभावी पैरवी की। फैसले के बाद अधिवक्ताओं और समर्थकों ने इसे न्याय की जीत बताया।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी एक अन्य मामले में आरोपी पप्पू साहू को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त किया गया था, जिसमें भी अधिवक्ता मौलेश तिवारी ने पैरवी की थी।


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