राजनांदगांव: मोटर साइकिलों में माेडिफाइड साइलेंसर लगाने का चलन तेजी से बढ़ता जा रहा है। खासकर बुलेट बाइक में लगाए जा रहे इन साइलेंसरों से निकलने वाली पटाखों जैसी तेज आवाज ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। कुछ माह पहले पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर बुलेट समेत अन्य वाहनों से माेडिफाइड साइलेंसर निकलवाए थे और वाहन चालकों पर चालानी कार्रवाई भी की थी। साथ ही दोबारा ऐसे साइलेंसर नहीं लगाने की चेतावनी दी गई थी, लेकिन पुलिस की सख्ती कम होते ही बाइक चालक फिर से कानफोड़ू साइलेंसर लगाकर सड़कों पर वाहन दौड़ाने लगे हैं।
पटाखों जैसी आवाज से सहम रहे बच्चे
माेडिफाइड साइलेंसरों से निकलने वाली तेज आवाज लोगों के लिए मुसीबत बन गई है। भीड़भाड़ वाले इलाकों में कुछ बाइक चालक जानबूझकर पटाखों जैसी आवाज निकालते हैं, जिससे बच्चे डर जाते हैं और बुजुर्गों को परेशानी होती है। शहर में ध्वनि प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। दोपहिया वाहनों को माेडिफाइड कर अमानक साइलेंसर लगाए जा रहे हैं, जिनसे निकलने वाली भद्दी और तेज आवाज आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। लंबे समय से मोडिफाइड साइलेंसर लगाने वालों पर सख्त कार्रवाई नहीं होने से बाइक चालकों के हौसले बुलंद हैं। पुलिस ने पहले ऑटो पार्ट्स संचालकों को भी ऐसे साइलेंसर नहीं बेचने की समझाइश दी थी, लेकिन इसके बावजूद खुलेआम इनकी बिक्री और फिटिंग जारी है। कुछ सामाजिक संस्थाओं ने भी ऐसे वाहन चालकों पर कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई थी, लेकिन अभियान ठंडा पड़ने से स्थिति फिर पहले जैसी हो गई है।
आधी रात गौरव पथ पर लगती है बाइक रेस
कार्रवाई कमजोर पड़ने से बाइकर्स अब बेखौफ नजर आ रहे हैं। शहर के गौरव पथ पर रात 12 बजे के बाद बाइकर्स जुटते हैं और रेस लगाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। स्पोर्ट्स बाइक और तेज रफ्तार वाहनों से आधी रात सड़कों पर स्टंट और रेसिंग की जा रही है, जिससे हादसों की आशंका बनी रहती है। कुछ महीने पहले पुलिस ने कुछ बाइकर्स पर कार्रवाई की थी, लेकिन अब अभियान फिर ठंडा पड़ गया है।