राजनांदगांव : ढाई दशक पहले बीएनसी मिल बंद होने के बाद औद्योगिक ठहराव झेल रहे राजनांदगांव में अब बड़ी परियोजना साकार होने जा रही है। शहर और आसपास की करीब पांच लाख आबादी के लिए यह परियोजना भविष्य की दिशा तय करने वाली मानी जा रही है। ग्राम बोईरडीह में 100 करोड़ रुपये की लागत से कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) संयंत्र स्थापित किया जाएगा, जिससे कचरे और बायोमास से ईंधन तैयार होगा। रायपुर स्थित स्पीकर हाउस में विधानसभा अध्यक्ष डा रमन सिंह की उपस्थिति में नगर निगम राजनांदगांव, छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (सीबीडीए) और भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के बीच त्रिपक्षीय कंसेशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए। इस एग्रीमेंट के तहत संयंत्र की स्थापना बीपीसीएल अपने निवेश से करेगा।
संयंत्र में नगर निगम क्षेत्र और आसपास के निकायों से प्रतिदिन 100 से 150 मीट्रिक टन ठोस अपशिष्ट और बायोमास का उपयोग होगा। इससे रोजाना 12 से 15 मीट्रिक टन जैव ईंधन का उत्पादन किया जाएगा। उत्पादित गैस को सिटी गैस पाइपलाइन से जोड़कर उपयोग में लाया जाएगा। इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिवर्ष करीब 30 हजार मानव दिवस रोजगार सृजित होंगे। साथ ही संयंत्र निर्माण के दौरान भी बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर बनेंगे। संयंत्र से मिलने वाली जैविक खाद से खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। परियोजना के पूर्ण संचालन के बाद जीएसटी के रूप में प्रतिवर्ष लगभग एक करोड़ रुपये की आय भी होगी। इसके साथ ही ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी।
त्रिपक्षीय कंसेशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर के दौरान सांसद संतोष पांडे, महापौर मधुसूदन यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण वैष्णव, पूर्व सांसद अभिषेक सिंह, विधायक प्रतिनिधि संतोष अग्रवाल, कलेक्टर जितेंद्र यादव, नगर निगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा, सीबीडीए के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमित सरकार, बीपीसीएल के कार्यपालिक निदेशक अनुराग सरावगी सहित सीबीडीए एवं बीपीसीएल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
पहली बड़ी औद्योगिक पहल
राजनांदगांव में बीएनसी मिल बंद होने के बाद बड़े उद्योगों की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी। रोजगार और आर्थिक गतिविधियों पर इसका असर पड़ा था। अब सीबीजी संयंत्र की स्थापना को इस ठहराव को तोड़ने वाली पहल माना जा रहा है। इससे न केवल औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार के नए अवसर भी बनेंगे।
पर्यावरण और खेती दोनों को फायदा
यह संयंत्र कचरे के निपटान की समस्या को कम करेगा और स्वच्छता को बढ़ावा देगा। साथ ही इसके सह-उत्पाद के रूप में मिलने वाली जैविक खाद किसानों के लिए उपयोगी होगी। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी और जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आंकड़ों में सीबीजी परियोजना
-100 करोड़ रुपये लगभग का निवेश
-100-150 मीट्रिक टन प्रतिदिन कच्चा माल कचरा व बायोमास
-12-15 मीट्रिक टन प्रतिदिन जैव ईंधन का उत्पादन
-30 हजार मानव दिवस प्रतिवर्ष रोजगार मिलेगा
-01 करोड़ रुपये सालाना लगभग जीएसटी आय होगी