खैरागढ़। जनजातीय समुदायों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और कुपोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से ग्राम मरकाटोला में स्वास्थ्य एवं पोषण सेवा संगम विशेष शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में गर्भवती महिलाओं, शिशुवती माताओं, बच्चों और किशोरी बालिकाओं को स्वास्थ्य, पोषण एवं व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया। इस दौरान बच्चों की ऊंचाई और वजन मापकर वृद्धि की निगरानी की गई, वहीं गर्भवती माताओं की पारंपरिक गोदभराई कर उन्हें सुपोषण का संदेश दिया गया। विकसित भारत 2047 के संकल्प एवं जनजातीय समुदायों के सशक्तीकरण के उद्देश्य से परियोजना छुईखदान के सेक्टर रामपुर अंतर्गत ग्राम मरकाटोला के बहुउद्देशीय केंद्र (एमपीसी) भवन में शिविर आयोजित किया गया।
स्वास्थ्य के लिए स्तनपान के महत्व की जानकारी दी
शिविर में पर्यवेक्षक प्रेमलता धुर्वे ने माताओं एवं अभिभावकों को नियमित स्वास्थ्य जांच, समय पर टीकाकरण और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए स्तनपान के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शिशु के छह माह की आयु पूरी होने के बाद स्तनपान के साथ पूरक आहार शुरू करना जरूरी है। इससे बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास को बेहतर आधार मिलता है। शिविर में बच्चों का वजन और ऊंचाई मापकर उनकी वृद्धि की स्थिति का आकलन किया गया। साथ ही पौष्टिक एवं संतुलित आहार, एनीमिया से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के उपाय बताए गए। किशोरी बालिकाओं को व्यक्तिगत स्वच्छता एवं मासिक धर्म के दौरान साफ-सफाई रखने के प्रति जागरूक किया गया।
पारंपरिक गोदभराई की रस्म निभाई
इस अवसर पर गर्भवती माताओं की पारंपरिक गोदभराई की रस्म निभाई गई। गंभीर कुपोषित बच्चे को सुपोषण किट प्रदान की गई, जबकि किशोरी बालिकाओं को स्वच्छता किट वितरित की गई। शिविर के माध्यम से जनजातीय परिवारों तक स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और मातृ-शिशु स्वास्थ्य में सुधार के लिए सामुदायिक सहभागिता पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में ग्राम पंचायत चोभर के उपसरपंच, मितानिन, शिक्षक, गर्भवती महिलाएं, शिशुवती माताएं, बच्चों के अभिभावक, किशोरी बालिकाएं एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।